arshad ali amroha
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शहीद अरशद अली और ITBP द्वारा गाँव में लाया जाता उनका जनाज़ा

अमरोहा – जनपद वासियों के लिए यह दिन किसी क़यामत से काम नहीं था जब उनकी आँखों के सामने पले-बड़े एक जवान का जनाज़ा उठाया गया। छत्तीसगढ़ में रविवार को हुए नक्सली हमले में अमरोहा के थाना सैदनगली क्षेत्र के गांव भदौरा निवासी आईटीबीपी जवान शहीद हो गया है। दुखद खबर से परिवार में कोहराम मच गया है।

अमरोहा के समीप भदौरा गाँव में किसान जमात अली के तीसरे नंबर का बेटा अरशद अली पांच वर्ष पूर्व आईटीबीपी में भर्ती हुआ था। उसकी तैनाती रायबरेली में हुई थी। दो वर्ष पूर्व बटालियन के संग अरशद को छत्तीसगढ़ भेज दिया गया। अरशद के बड़े भाई राशिद अली के मुताबिक बटालियन छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके नरायनपुर में कॉबिंग कर रही थी। बकौल राशिद रविवार शाम करीब 6 बजे बटालियन के आला अधिकारी का फोन आया। उन्होंने बताया कि नक्लसियों से मुठभेड़ के दौरान अरशद को गोली लगी है और वह घायल हैं।

बड़े भाई को गोली लगने की खबर सुनकर राशिद जो की अरशद से छोटे है वो तुरंत छतीसगढ़ के लिए निकल पड़े, लेकिन अभी वो सिर्फ गजरौला ही पहुँच पाए थे की फिर एक अधिकारी का फ़ोन आया जिसने बताया की अरशद अली शहीद हो गये हैं. खबर के घर पहुँचते ही घर में कोहराम मच गया. वृद्ध पिता जमात अली व मां सैयदा खातून का रोते-रोते बुरा हाल है। अगले माह अरशद की शादी होने वाली थी। घर पर करीब पंद्रह दिन की छुट्टी बिताने के बाद 10 सितंबर को अरशद ड्यूटी पर गये थे।

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मेरे परिवार की गाड़ी का इंजन जुदा हो गया: पिता

अपने अम्मी,अब्बू और भाइयों को बेहद चाहने वाले अरशद, परिवार के लिए रीढ़ की हड्डी समान थे.पिता जमात अली के पास खेती की जमीन है। इसमें खेती-बाड़ी कर ठीक-ठाक गुजर चल रही थी। करीब पांच वर्ष पूर्व अरशद की आईटीबीपी में नौकरी लगी थी। इसके बाद से परिवार की आर्थिक हालत और सुदृढ़ हुई। पिछले दिनों अरशद ने हसनपुर में दो दुकान खरीदने के लिए परिवार को काफी मदद दी थी। 21 अगस्त को अरशद छुट्टी पर गांव आये थे।

लगभग पंद्रह दिन गाँव में बिताने के साथ साथ उन्होंने खेत पर बिजली की लाइन लगवाई और नया बोरिंग करवाया. वह सिंचाई के साधन अच्छे करने पर ध्यान दे रहे थे जिससे खेतीबाड़ी से अधिक फसल निकल सके. सोमवार को घर के बगल की अपनी बैठक में रोते हुए अरशद के पिता जमात अली कह रहे थे कि मेरे घर की गाड़ी को खींचने वाला इंजन चला गया। यहां मौजूद लोग उन्हें चुप करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उनकी रूलाई नहीं रूक रही थी। बार-बार बेटे की बातों को याद कर रहे थे।

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