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जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से लापता हुए छात्र नजीब अहमद को वापस लाने की मांग को लेकर लखनऊ के हजरतगंज जीपीओ स्थित गांधी प्रतिमा के सामने शहर के सभी काॅलेजों के छात्रों ने मिलकर जमकर विरोध-प्रदर्शन किया.

स्टूडेंट्स फाॅर डेमोक्रेटिक राइट्स के बैनर तले हुए इस विरोध प्रर्दशन में इंटिगरल विश्वद्यिालय, बीबीडीयू, एरम मेडिकल काॅलेज, बीएनसीइटी, लखनऊ विश्वविद्यालय, राममनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय, बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, शिया पीजी काॅलेज, डाॅ शकुंतला मिश्रा राष्ट्री य पुर्नवास विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों ने हिस्सा लिया.

छात्रों को सम्बोधित करते हुए अलीगढ़ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी ने कहा कि आज 50 दिन बाद भी जेएनयू से गायब हुए छात्र नजीब को तलाश पाने में मोदी सरकार नाकाम रही है. जो साबित करता है कि केंद्र सरकार अपने समर्थक एबीवीपी कार्यकर्ताओं द्वारा उत्पीड़न के शिकार इस छात्र को ढूंढने में कोई दिलचस्पी नहीं रखती.

इंटिगरल विश्वविद्यालय के छात्र मो0 ओवैस ने कहा कि नजीब का परिवार पिछले 50 दिनों से खौफ और दहशत में जी रहा है. उनका परिवार आने वाले हर अज्ञात फोन को इस उम्मीद से उठाता है कि नजीब का फोन होगा. ये वक्त देश के सभी छात्रों का नजीब के परिवार के साथ खड़े होने का है. क्योंकि आज अगर हम नजीब के साथ नहीं खड़े हुए तो कल हमारे साथ भी कोई नहीं खड़ा होगा.

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रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि नजीब यूपी के बदायूं का रहने वाला है इसलिए उसकी बरामदगी की मांग सपा सरकार को भी करनी चाहिए थी. लेकिन अपने को मुसलमानों का रहनुमा बताने वाली सपा के सांसदों ने एक बार भी केंद्र सरकार पर नजीब को ढ़ूंढने का दबाव नहीं बनाया. जो साबित करता है कि मुलायम के कुनबे को मुसलमानों का वोट तो चाहिए लेकिन उनकी सुरक्षा की चिंता उसे नहीं है.

वहीँ पत्रकार संदीप राऊजी ने कहा कि जो व्यक्ति या संगठन संघ परिवार से असहमत है उसे निशाना बनाया जा रहा है. जबकि साम्प्रदायिक और दलित विरोधी हिंसा करने वालों को खुली छूट मिली हुई है. जनआगाज के राष्ट्रीय महासचिव शाहरुख अहमद ने कहा कि पिछली सरकारों में तो सिर्फ कैम्पसों की शिक्षण व्यवस्था पर सवाल उठता था लेकिन मोदी सरकार में तो कैम्पसों से छात्रों को ही गायब कर दिया जा रहा है.


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