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लखनऊ। शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी द्वारा मदरसों को आतंक से जोड़ने और उन्हें बंद करने की मांग को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि किसी भी मदरसे को बंद नहीं किया जायेगा.

गुरुवार को नौ उत्तरी राज्यों के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रियों की समन्वय समिति की बैठक का उद्घाटन करते हुए कहा कि ‘हम मदरसों के आधुनिकीकरण की तरफ ध्यान दे सकते हैं. बंद करना किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि समय के साथ हम उनमें व्यापक सुधार कर सकते हैं. मैं तो संस्कृत विद्यालयों से भी कहता हूं कि वे परम्परागत शिक्षा जरूर लें लेकिन प्रतिस्पर्धा में बने रहना है तो उसके साथ अंग्रेजी, विज्ञान, गणित और कम्प्यूटर का भी ज्ञान होना चाहिए. मदरसों की शिक्षा के साथ हमें विज्ञान और कम्प्यूटर भी जोड़ना होगा. तभी उस शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों के सामने बेहतर भविष्य की राह दिखेगी.’’

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विधानभवन के तिलक हॉल में उन्होंने कहा, “जब हम अल्पसंख्यक कल्याण की बात करते है तो हमारे सामने बहुत सारे सवाल खड़े होते हैं. अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय पर बेहद अहम जिम्मेदारी है. अगर हमारे शरीर का कोई अंग काम करना बंद करता है तो हमें दिव्यांग कहा जाता है. अगर समाज में किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव होता है तो वो अपने आपको उपेक्षित महसूस करता है.”

सीएम योगी ने कहा, “मुख्तार अब्बास नकवी के मंत्री बनने के बाद और यूपी में उनके आगमन के बाद यहां अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई है. उनके सरकार के 9 महीने के कार्यकाल में ही 100 से अधिक कार्य योजनाओं की शुरुआत अल्पसंख्यकों के लिए की गई है.”

समन्वय समिति की बैठक में केन्द्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, बिहार, दिल्ली तथा पंजाब समेत नौ राज्यों के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री तथा अधिकारी शामिल थे.