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मुजफ्फरनगर: कड़ी मेहनत और लगन से आज अंजुम सैफी ने वो मुकाम हासिल कर लिया है. जिसका ख्वाब उनके पिता ने 25 साल पहले संजोया था. हालांकि वे आज अपनी बेटी की कामयाबी को देखने के लिए इस दुनिया में मौजूद नहीं है.

लोक सेवा आयोग की पीसीएस जे-2016 परीक्षा में सफल होने वाली अंजुम सैफी 1992 में सिर्फ चार साल की थीं जब उनके पिता को गोलियों से छलनी कर दिया गया था. 25 साल बाद आज अंजुम जज बन गई हैं. अंजुम अपने परिवार में छह भाइयों की इकलौती बहन है.

अंजुम की सिविल जज के परीक्षा परिणाम में 159वीं रैंक आई है. ग्रेन चेंबर से इंटर करने के बाद अंजुम सैफी ने डीएवी डिग्री कॉलेज से एलएलबी पूरी की और मेरठ कॉलेज से एलएलएम किया है. अंजुम के बड़े भाई दिलशाद अहमद ने बताया, ‘पापा के खोने के बाद उनके सपनों को पूरा करने के लिए हम सभी ने कड़ी मेहनत की है.

उन्होंने कहा कि अंजुम ने जो हासिल किया है, उसके पीछे उसकी कड़ी मेहनत है. हमने तमाम कठिनाइयों का दौर देखा लेकिन हम हारे नहीं. उसका ही नतीजा है कि आज मेरी बहन इस मुकाम पर है.’

अंजुम ने कहा, ‘मेरे पिता ने सत्य की लड़ाई लड़ते हुए जान दी. वह हमेशा ही समाज में बेहतर बदलाव लाना चाहते थे. मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि मैं उनके बताए रास्तों पर चल सकूं. उन्होंने कहा कि वह सिविल जज बनकर वह गरीबों और निर्धन लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने का प्रयास करेंगी.

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