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कथित तौर पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के पीएचडी स्‍कॉलर मन्नान बशीर वानी के हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ने की खबरों को एएमयू छात्रों ने विश्वविद्यालय को बदनाम करने की साजिश करार दिया.

दरअसल, हाल ही में वानी की हाथ में एके-47 वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी. जिसके बाद मीडिया में खबर आई कि वानी हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ चुका है. वानीकुपवाड़ा जिले के लोलाब के ताकीपोरा गांव का रहने वाला है. और उसका भाई जूनियर इंजीनियर है.

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मनान वानी पिछले पांच साल से एएमयू में पढ़ रहा है. वह एम फिल कर रहा चूका था. वह अब जिऑलजी में पीएचडी कर रहा है. मन्नान के साथ पढ़ने वाले कुछ छात्रों ने उसके आतंकी संगठन से जुड़ने पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि मन्नान ऐसा नहीं कर सकता. वह बहुत ही होशियार छात्र था. यह उसे फंसाने की साजिश हो सकती है.

साथी छात्रों में से एक जुनैद ने बताया कि कैंटीन में कभी-कभार मुलाकात हो जाया करती थी. हालांकि छात्रों का ये भी कहना है कि वायरल फोटो मॉर्फ्ड भी हो सकती है. मन्नान को हाल ही में उसे भोपाल में बेस्ट पेपर प्रेजेन्टेशन के लिए अवार्ड भी मिला था. साथी छात्रों का कहना है कि आरोप से पहले सरकार उसके बारे  में पूरी जानकारी एकत्र करनी चाहिए.

इस बारें में वानी के भाई ने बताया, हमलोगों ने भी सोशल नेटवर्किंग साइटों पर उसकी तस्‍वीर देखी है. लेकिन, हमें अभी इस बारे में कुछ भी मालूम नहीं है कि वह आतंकी संगठन में शामिल हुआ है या नहीं. हम 4 जनवरी से ही उससे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं. उसका मोबाइल फोन लगातार स्विच ऑफ है. हमें लगता है कि उसने कुछ वजहों से फोन बंद कर दिया होगा या फिर फोन खो गया होगा. उससे संपर्क नहीं होने के कारण हमलोगों ने शनिवार (6 जनवरी) को पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

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