Wednesday, June 23, 2021

 

 

 

‘लव जिहाद’ पर जारी बहस के बीच, कर्नाटक HC ने अपनी पसंद से शादी को बताया मौलिक अधिकार

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कथित लव जिहाद को लेकर बीजेपी शासित राज्यो में लाए जा रहे क़ानूनों के बीच कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपने एक निर्णय में अपनी पसंद से शादी करने को मौलिक अधिकार बताया है। अदालत ने कहा है कि यह अच्छी तरह से समझा जाना चाहिए कि किसी भी प्रमुख व्यक्ति का अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने का अधिकार भारत के संविधान में एक मौलिक अधिकार है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने कहा कि यह अच्छी तरह से तय किया गया था कि किसी भी प्रमुख व्यक्ति का “उसकी पसंद के व्यक्ति से विवाह करना” भारत के संविधान में एक मौलिक अधिकार है। दो व्यक्तियों की व्यक्तिगत संबंधों से संबंधित स्वतंत्रता को जाति या धर्म के बावजूद किसी भी तरह से अतिक्रमण नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि कर्नाटक एचसी डिवीजन बेंच के जस्टिस एस सुजाता और सचिन शंकर मगदुम 27 नवंबर को दो सॉफ्टवेयर पेशेवरों से जुड़े एक मामले पर सुनवाई कर रही थी। वाजिद खान एच बी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एस सुजाता और न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम की एक खंडपीठ ने यह टिप्पणी की।

अपनी याचिका में वाजिद ने अपील की थी कि अदालत के समक्ष अपने साथी राम्या जी को पेश करने के लिए निर्देश दिया जाए और उन्हें स्वतंत्रता प्रदान की जाए। जिसके बाद पुलिस ने राम्या को उसके माता-पिता के साथ अदालत में पेश किया। राम्या ने अदालत को बताया कि वह 07 नवंबर, 2020 से विद्यारण्यपुरा में दक्षिणा समिति में रह रही थी, जबसे उसने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके माता-पिता द्वारा उसकी स्वतंत्रता का उल्लंघन किया जा रहा।

खान और राम्या, एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर और सहकर्मी, दोनों शादी करना चाहते हैं, लेकिन बाद वाले परिवार के सदस्यों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि खान की मां ने अदालत से कहा कि उसने सहमति व्यक्त की है, लेकिन राम्या के माता-पिता ने ऐसा नहीं किया।

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