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गुजरात के अहमदाबाद में दलितों ने इस नवरात्रि में अंबेडकर गरबा आयोजित किया है. करीब 100 दलित परिवारों ने ये कदम दलितों पर जारी हिंसा के चलते उठाया है. अंबेडकर गरबा पंडालों में अंबेडकर भजन भी सुनाई देता है.

रामपुरा गांव में “अंबेडकर गरबा” के आयोजक कनू सुमसेरा मंगलभाई इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, “गुजरात में ऐसा पहली बार हुआ है. मुझे अपने गांव वालों को ये समझाने में पांच साल लगे कि देवी-देवताओं की जगह अंबेडकर की पूजा करना ज्यादा बेहतर है. हमारे समाज में लोग सशंकित थे और उन्हें लगता था कि देवता उन्हें उजाड़ देंगे.

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अंबेडकर भजन के बारे में मंगलभाई ने बताया कि हिन्दी फिल्म जय संतोषी माँ के प्रसिद्ध भजन के आधार पर ही अंबेडकर भजन तैयार की गयी है जिसके बोल हैं, “मैं तो आरती उतारूं रे अंबेडकर साहिब की…जय, जय, अंबेडाकर बाबा जय जय जय.”

मंगलभाई ने बताया कि जब मैंने पहले पहल ये आइडिया दिया तो गाँव के दूसरे दलितों को लगा कि मैं पागल हो गया हूं. कुछ ने मुझसे कहा कि नवरात्रि में देवी की पूजा होती है और उनका अपमान करना दुर्भाग्य लाएगा. मैंने उन्हें बताया कि देवी के लिए सब समान हैं लेकिन हमारे गाँव के सवर्ण हमें नवरात्रि गरबा में नाचने नहीं देते.”

ध्यान रहे हाल ही में आणंद जिले में गरबा देखने गए एक दलित की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी. इस हत्या का आरोप पटेल समुदाय के लोगों पर लगा है. इसके अलावा गांधीनगर गांव में मंगलवार को एक दलित किशोर को दो अज्ञात मोटरसाइकिल सवारों ने ब्लेड मारकर घायल कर दिया.

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