उत्तर प्रदेश में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा में हुए संपत्ति के नुकसान की वसूली को लेकर जारी किए गए नोटिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। ये नोटिस एडीएम सिटी कानपुर ने नोटिस जारी की थी।

कानपुर के मोहम्मद फैजान की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति एसएस शमशेर की खंडपीठ ने बीते दिसंबर में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान को लेकर एडीएम सिटी कानपुर द्वारा जारी वसूली नोटिस के खिलाफ दायर एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान के मामले में तय की गई गाइडलाइन के तहत लोक संपत्ति के नुकसान का आकलन करने का अधिकार हाईकोर्ट के सीटिंग या सेवानिवृत्त जज अथवा जिला जज को है। एडीएम को नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में नियमावली बनाई है। वह नियमावली सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है।

हाईकोर्ट के फैसले के पक्ष में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तंज कसा है। सोमवार को अखिलेश यादव ने ट्वीट करके कहा कि बदला-बाबा’ अब क्या करेंगे? अब इस फैसले का बदला किससे लेंगे?? सपा सुप्रीमो आगे कहते हैं कि मुखिया हैं तो क़ायदे-क़ानून का इल्म भी होना चाहिए और इंसाफ़ की नियत और निगाह भी। ये पद ज़िम्मेदारी का है प्रतिशोध की ज़हरीली भाषा बोलने का नहीं।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले के बाद विभिन्न जिलों में कई लोगों को वसूली के नाम पर प्रशासन की तरफ से लाखों रुपये के नोटिस जारी कर दिए गए। कई नोटिस ऐसे लोगों को जारी कर दिए गए क्योंकि उनकी दुकान उस जगह पर थी, जहां प्रदर्शन हुआ। इसमें ये भी आरोप है कि जानबूझकर मुसलमानों को केवल नोटिस भेजा गया।

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