Thursday, June 17, 2021

 

 

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश के तहत गिरफ्तारी पर रोक लगाई

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उत्तर प्रदेश के नए धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत एक महिला का कथित तौर पर धर्म परिवर्तन कराने के प्रयास के मामले में आरोपी नदीम की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की खंडपीठ ने नदीम नाम एक मजदूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य की पुलिस को याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई बल प्रयोग नहीं करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट का कहना है कि महिला और पुरुष दोनों वयस्क हैं और ये उनकी निजता का मौलिक अधिकार है।

बता दें कि पेशे से मजदूर नदीम के खिलाफ 29 नवंबर को मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर पुलिस थाने में महिला के पति की शिकायत पर धर्मांतरण विरोधी कानून और आईपीसी की धारा 120बी, 506 और 504 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

याचिकाकर्ता के वकील एसएफए नकवी ने दलील दी कि यह अध्यादेश भारत के संविधान के खिलाफ है और इसके प्रावधानों के तहत शूरू की गई किसी भी तरह की आपराधिक कार्यवाही रद्द की जानी चाहिए।

एफआईआर में नदीम के खिलाफ आरोप है कि वह शिकायतकर्ता का परिचित था और अक्सर उसके घर आया जाया करता था। शिकायतकर्ता की पत्नी से जान पहचान का कथित रूप से नाजायज फायदा उठाकर उसने धर्म परिवर्तन के लिए उसे राजी करने का प्रयास किया ताकि वह उससे शादी कर सके। इस उद्देश्य के लिए नदीम ने एक मोबाइल फोन खरीद कर शिकायतकर्ता की पत्नी को फोन उपहार में दिया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘हमारे समक्ष ऐसी कोई सामग्री पेश नहीं की गई, जिससे पता चले कि महिला का याचिकाकर्ता द्वारा जबरदस्ती धर्म-परिवर्तन कराया गया। सभी आरोप प्रथमदृष्टया संदेह के आधार पर हैं।’ अदालत ने कहा, “पीड़िता (शिकायतकर्ता की पत्नी) वयस्क है जो अपना भला बुरा समझती है। वह और याचिकाकर्ता के पास निजता का मौलिक अधिकार है और उन्हें अपने कथित रिश्तों के परिणामों की भलीभांति जानकारी है।”

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