प्रयागराज. 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की योगी सरकार मंशा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने ओबीसी की 17 जातियों को अनुसूचित जाति (में शामिल करने के योगी सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है।

जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राजीव मिश्र की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिया है। कोर्ट ने योगी सरकार के फैसले को गलत मानते हुए कहा कि इस तरह के फैसले लेने का अधिकार सरकार को नहीं था। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया योगी सरकार के फैसले को गलत मानते हुए प्रमुख सचिव समाज कल्याण मनोज कुमार सिंह से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।

बता दें कि योगी सरकार ने जून महीने के अंतिम हफ्ते में 17 ओबीसी जातियों को एससी में शामिल करने का आदेश जारी किया था। राज्य सरकार ने 24 जून 2019 को शासनादेश जारी करते हुए 17 ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति (एससी) में शामिल करने का शासनादेश जारी किया था।

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17 जातियों में कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिन्द, भर, राजभर, धीमर, वाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी और मछुआरा शामिल हैं। लेकिन योगी सरकार के इस फैसले पर उन्हीं के पार्टी से विरोध के स्वर उठे थे। केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने प्रदेश सरकार के फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए कहा था कि यह अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है। इसके लिए संसद से मंजूरी जरूरी है।

हालांकि योगी सरकार ने अपने इस फैसले के बाद सभी जिलाधिकारियों को इन जातियों के परिवारों को प्रमाण दिए जाने का आदेश दे दिया था। राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिनियम 1994 की धारा 13 के अधीन शक्ति का प्रयोग करके इसमें संशोधन किया है।

प्रमुख सचिव समाज कल्याण मनोज सिंह की ओर से इस बाबत सभी कमिश्नर और डीएम को आदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस बाबत जारी जनहित याचिका पर पारित आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। इन जातियों को परीक्षण और सही दस्तावेजों के आधार पर अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी किया जाए।

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