मथुरा के नंदगांव (Nandgaon) स्थित नंदबाबा मंदिर (Nandbaba Nand Mahal Temple) में कथित तौर पर धोखे से नमाज अदा करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि तर्कहीन और विवेकहीन गिरफ्तारियां सिर्फ मानवाधिकार का उल्लंघन हैं और पुलिस के पास गिरफ्तारी आखिरी विकल्प होना चाहिए।

आरोप है कि 29 अक्टूबर को मथुरा के नंद बाबा मंदिर परिसर में चार लोग आए। इनमें से दो लोगों ने मंदिर के सेवायतों को गुमराह कर मंदिर परिसर में ही नमाज पढ़ी। पुलिस ने हिन्दू संगठनों की शिकायत पर इस मामले में एफ़आईआर दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ 53-A, 295, 505 के तहत बरसाना थाने में मुकदमा दर्ज किया था।

इनमें एक व्यक्ति फैसल खान था, जिसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। बाकियों की पहचान चांद मोहम्मद, आलोक रतन और नीलेश गुप्ता के तौर पर हुई थी। गिरफ्तारी के बाद 18 दिसंबर को फैसल खान को जमानत मिल गई थी। वहीं अब एक अन्य आरोपी चांद मोहम्मद को हाईकोर्ट ने मंगलवार को अग्रिम जमानत दी है।

चांद मोहम्मद के के वकील अली कंबर जैदी ने सुनवाई के दौरान कहा कि सिर्फ कुछ फोटो वायरल होने के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि उनके मुवक्किल का इरादा समाज में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का था। हालांकि, सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मोहम्मद को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।

हालांकि, हाईकोर्ट की एकल जज बेंच ने कहा कि पुलिस के पास गिरफ्तारी आखिरी विकल्प होना चाहिए और यह सिर्फ तभी किया जाना चाहिए, जब आरोपी की गिरफ्तारी अनिवार्य हो या उसकी न्यायिक जांच करनी हो। जस्टिस सिद्धार्थ ने एक पुराने केस का हवाला देते हुए नेशनल पुलिस कमीशन की एक रिपोर्ट का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि भारत में पुलिस द्वारा गिरफ्तारियां पुलिस में भ्रष्टाचार का मुख्य कारण हैं।

जज ने आगे कहा, “इस रिपोर्ट से साफ है कि तकरीबन 60 फीसदी गिरफ्तारियां या तो गैरजरूरी थीं या अनुचित। इस अनुचित पुलिस कार्रवाई की वजह से जेल का खर्च 43.2 फीसदी रहा है। जज ने कहा कि निजी स्वतंत्रता एक अहम मौलिक अधिकार है और इसे सिर्फ तभी कम किया जा सकता है, जब और कोई चारा न रहे। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी।