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झारखंड के रामगढ़ मे कथित गौरक्षा के नाम पर पीट-पीट कर की गई अलीमुद्दीन अंसारी की हत्या के मामले मे सजायाफ्ता 11 में से 8 दोषियों को झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जमानत दे दी है।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद से ही अलीमुद्दीन के घर मे सन्नाटा पसरा हुआ है। मृतक अलीमुद्दीन की पत्नी मरियम खातून ने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट मे अपील करेगी। उन्होने कहा, ‘मै इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाऊंगी।’

शुकवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान दोषियों के वकील बीएम त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस घटना के वीडियो पर भी सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सज़ा का मुख्य आधार इस वीडियो को बताया था, लेकिन यह वीडियो किसने बनाया, यह पुलिस तक कैसे और कब पहुंचा, इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गयी।

पुलिस जांच में भी यह सामने नहीं आया कि वीडियो कैसे और किसके द्वारा बनाया गया। बीएम त्रिपाठी ने वीडियो की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं। साथ ही पोस्टमार्टम में मृतक का नाम नहीं है। इसलिए अभियुकों को ज़मानत मिलनी चाहिए।

ऐसे मे जस्टिस एचसी मिश्रा और जस्टिस बीबी मंगलमूर्ति की बेंच ने रोहित ठाकुर, कपिल ठाकुर, राजू कुमार, संतोष सिंह, उत्तम राम, सिकंदर राम, विक्की साहू और रामगढ़ जिला भाजपा मीडिया प्रभारी रहे नित्यानंद महतो को जमानत दे दी।

बता दें कि इस मामले मे स्थानीय भाजपा नेता नित्यानंद महतो, विक्की साव, सिकंदर राम, उत्तम राम, विक्रम प्रसाद, राजू कुमार, रोहित ठाकुर, और कपिल ठाकुर को कोर्ट ने धारा 147, 148, 427/149, 135/149, 302/149 के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही एक नाबालिग आरोपी का मामला जुवेनाइल कोर्ट में विचाराधीन है।

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