बच्चों के लिए दुधारू गाय लेकर आ रहा था अकबर, हथियार बंद लोगों ने किया था हमला

12:20 pm Published by:-Hindi News
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राजस्थान के अलवर जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत गौरक्षकों के हाथों मारा गया अकबर अपने बच्चों के लिए दुधारू गाय लेकर आ रहा था। इस दौरान हथियार बंद लोगों ने उस पर हमला किया और उसकी जान ले ली।

गोरक्षकों के हमले में जान बचाकर निकले और घटना के चश्मदीद असलम खान ने बताया कि वह अकबर के साथ गाय खरीदने के लिए 19 जुुलाई को अलवर के गांव खानपुर गया था। वहां पर अकबर का कोई मिलने वाला है उससे 60 हजार में गाय का सौदार किया था। गाय के एक बछड़ा भी था। उन्होंने दिन में गाय को घर लाने के लिए कई वाहन चालकों से बात की लेकिन कोई भी तैयार नहीं हुआ। ऐसे में उन्होंने तय किया कि रात के समय वे गाय-बछड़े को ले जाएंगे, क्योंकि दिन में उन्हें  गाय  छीनने का डर था।

शुक्रवार रात वे खानपुर गांव से कोलगांव के लिए चल दिए। अकबर ने गाय के गले में बंधी रस्सी पकड़ रखी थी और वह पीछे-पीछे चल रहा था। रात करीब एक बजे जब वह सरदारों के गांव लालवंडी के पास से गुजर रहे थे तो मोटरसाइकल पर सवार दो-तीन लोगों ने हवा में फायर की। फायर की आवाज सुनते ही वह पेडों की ओट में हो गया। अकबर गाय को छोड़कर भागने लगा। हथियार बंद लोग भी उसके पीछे भागने लगे। कुछ दूर से उसे आवाज सुनाई दे रही थी कि वह अकबर को बुरी तरह मार रहे हैं। वह किसी तरह जान बचाकर वहां से निकल लिया।

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दूसरी और अकबर के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अकबर की पत्नी असमीना ने बताया कि अकबर कोई ऐसा काम नहीं करता था जो गलत हो, वो तो बच्चों के लिए दुधारू गाय लाने गया था। दिन में गाय इसलिए नहीं लाते क्योंकि वहां के लोग गायों को छींन लेते है और मारते-पीटते हैं। इसलिए वह वहां से रात में गाय लेकर चला था।

कोलगांव निवासी हाजी अख्तर, जाकिर नंबरदार, खलील, सफी मोहम्मद का कहना है कि आखिर कब तक इन गुंडागर्दी चलती रहेगी। कथित गोरक्षक न जाने कितने बच्चों को यतीम और महिलाओं को विधवा बना चुके हैं। उनका कहना है कि अकबर दूध बेचकर और मजदूरी कर अपने सात बच्चों को पाल रहा था। अब उसके बच्चे लावारिस हो गए  हैं। सरकार को चाहिए की गरीब परिवार की हरसंभव मदद करे।

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