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राजसमंद: मुस्लिम बुजुर्ग मुहम्मद अफजरुल की की निर्मम हत्या के मामले में शुरूआती जांच में सामने आया कि हत्यारे शंभूलाल रेगर का अफजरुल के साथ किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं था. बल्कि वह तो उसे जानता भी नही था.

ये पूरा हत्याकांड मुस्लिमों से नफरत और धोखे पर आधारित है. 6 दिसंबर की दोपहर को अपने भांजे को लेकर वह जलचक्की चौराहे पर कुछ बंगाली मजदूरों से मिलने पहुंचा. जहाँ उसने चुनाई के बहाने मजदूरों से ठेकेदार के नंबर मांगे. मजदूरों में से के ने उसे अफजरुल के नंबर दिए.

अफजरुल से बात कर शंभू ने उसे निर्माण कार्य के लिए ठेका देने की बात कही. साथ ही उसे निर्माण की जगह देखने को कहा. उसने अपने भांजे के साथ जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने एक होटल पर चाय भी पी. इस दौरान बताए बिना वह भांजे को बाइक पर बिठा कर पेट्रोल पम्प पर पहुंच गया. इसी दौरान उसने गेती भी ली. हालांकि जब तक अफजरुल जा चूका था.

शंभू ने फिर से अफजरुल को फोन किया और कहा, आप कहां चले गए. मैं तो गेंती लेने चला गया और आप मौका देख लो, जहां चारदीवारी का कार्य करना है. आप जिस भी रेट में कार्य करना चाहो, ले लेना. इस पर कुछ ही देर बाद अफजरुल मौके पर पहुंचा.

शंभू भांजे के साथ स्कूटी पर और अफजरुल बाइक से होटल के मार्ग पर खेत पर पहुंचा. बाइक से उतर कर अफजरुल खड़ा हुआ. मगर शंभू ने उसे आगे चलने की बात कही. फिर जैसे ही अफजरुल आगे बढ़ा, तो भांजे ने मोबाइल कैमरे में वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी, तभी शंभू ने गेंती से इफराजुल की पीठ में वार कर दिया.

उसने एक के बाद के वार किये और दूसरी और उसके भांजे ने मोबाइल कैमरा ऑन कर रिकॉर्डिंग शुरू कर दी. उसने अपने नाबालिग भांजे को रिकॉर्डिंग का पहले से ही प्रशिक्षण दिया हुआ था.

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