शहंशाह-ए-हिन्द हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती (रह.) का 805वा उर्स का मंगलवार को बड़े कुल की रस्म के साथ समापन हुआ. इस दौरान जायरीन ए ख्वाजा ने केवड़े व गुलाब जल से दरगाह परिसर की धुलाई की.

खादिमों की ओर से गरीब नवाज की मजार को केवड़े व गुलाब जल से गुस्ल दिया गया. जिसमे दुनिया भर से आए जायरीनों ने शिरकत की. कुल की रस्म निभाते हुए पूरा आस्ताना शरीफ केवड़ा और गुलाब जल से महक उठा. हालांकि इस दौरान सुबह आठ बजे से ही आस्ताना शरीफ को आम जायरीनों के लिए बंद कर दिया गया. कुल की रस्म के दौरान आस्ताने पर केवल खुद्दाम-ए-ख्वाजा (खादिमो) को ही अंदर रहने की इजाजत मिली.

इसके बाद 11 बजे महफिलखाने में कुल की महफिल सजी जिसकी सदारत सैयद फजलुल मतीन चिश्ती की सदारत में की गई. शाही चौकी के कव्वालों के अलावा बाहरी कव्वालों ने भी कलाम पेश किए और दोपहर सवा बजे कुल की रस्म निभाई गई. कुल की रस्म के लिए दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन आस्ताना शरीफ में आए और कलंदरों की टोली छतरी गेट से महफिलखाने में जाकर दागोल की रस्म को निभाया.

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मोरुसी अमला सहित कलंदरों के सरगिरोह की दस्तारबंदी की गई और कुल की रस्म के बाद खादिमों की भी दस्तारबंदी उनके दुआगो द्वारा की गई तथा खादिमों ने भी आम जायरीनों की दस्तारबंदी की रस्म निभाई. इसी के साथ दो बजे जन्नती दरवाजे को भी बंद कर दिया गया. इस दौरान बड़े पीर की पहाड़ी से तोप के गोले भी दागे गए और ढाई बजे खिदमत की गई तथा पौने चार बजे आस्ताना आम जायरीनों की जियारत के लिए खोल दिया.

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