अजमेर में विश्व प्रसिद्ध हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती (रह.) की दरगाह शरीफ में हुए बम ब्लास्ट मामले में एनआईए की विशेष अदालत की ओर से दोषी ठहराए गए आरोपियों को अब 22 मार्च को सज़ा होगी. अदालत अब दोनों दोषियों को सजा 22 मार्च को सुनाएगी.

एनआईए की विशेष अदालत ने 8 मार्च  को इस मामलें में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया था लेकिन उन्हें सजा पर फैसला 18 मार्च तक टाल दिया गया. 18 मार्च को बचाव पक्ष की दलीलों के बाद कोर्ट ने अब फैसला 22 मार्च के लिए टाल दिया है.

कोर्ट ने इस केस में 3 को दोषी ठहराया है, जबकि 5 को बरी कर दिया था. कोर्ट ने RSS नेता इंद्रेश कुमार को क्लीन चिट देने के साथ ही स्वामी असीमानंद को भी बरी कर दिया था. इस मामलें में भावेश और देवेंद्र गुप्ता को सहित मृतक सुनील जोशी को भी दोषी ठहराया गया है.

इस मामले में स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, चंद्रशेखर लेवे, मुकेश वसानी, भारत मोहन रतेश्वर, लोकेश शर्मा और हर्षद सोलंकी पर मुकदमा दर्ज हुआ था. 11 अक्टूबर 2007 को हुए इस धमाके में तीन लोगों की मौत हो गयी थी जबकि 17 से अधिक लोग घायल हो गए थे.

2011 में इस केस को एनआईए को सौंप दिया गया था। उसके बाद एनआईए ने आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसमें असीमानंद को मास्टरमाइंड बताया गया था. इस मामले में कुल 184 लोगों के बयान दर्ज किए गए, जिसमें 26 महत्वपूर्ण गवाह अपने बयानों से मुकर गए थे.

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