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मुंबई: पुणे के निकट भीमा-कोरेगांव में सोमवार को शोर्य दिवस मना रहे दलितों पर भगवा कार्यकर्ताओं के हमले के बाद पुरे राज्य में तनाव फ़ैल गया है. राज्य के 13 शहरों में प्रदर्शन के चलते धारा 144 लागू की गई है.

200 साल पहले ईस्ट इंडिया कंपनी की और से महारों ने पेशवा सेना से युद्ध किया था. इस दौरान अछूत समझे जाने वाले महारों की 500 सैनिकों की सेना ने 28 हजार योद्धा की पेशवा सेना को हरा दिया था. हर साल दलित समुदाय इस दिन शोर्य दिवस मनाता है.

सोमवार दोपहर को कार्यक्रम हिस्सा लेने जा रहे दलितों पर हमले के बाद शुरू हुई हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई. जिसके बाद हिंसा उग्र हो गई. लोगों ने पुणे-अहमदनगर हाईवे पर करीब 100 गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की. इस मामले में महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने घटना की ज्यूडिशियल इन्क्वॉयरी के आदेश दिए हैं.

इस बीच दलित संगठनों ने महाराष्ट्र बंद का ऐलान किया है. इसी के साथ मंगलवार सुबह से ही मुंबई में ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे को रोककर ट्रैफिक को पूरी तरह ठप कर दिया गया. हिंसा का असर मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा पर भी हुआ है. चेंबूर के पास हार्बर लाईन रोकी गई है. ठाणे में लोगों भी ने प्रदर्शन किया. अहमदनगर, अकोला, धुले, परभणी, शिरडी, औरंगाबाद में बसों पर पथराव किया गया.

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने इस हिंसा के लिए दक्षिणपंथी संगठनों की जिम्मेदार बताया है और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है. पवार ने कहा, “भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह मनाई जा रही थी. हर साल यह दिन बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है. लेकिन इस बार कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने यहां की फिजा को बिगाड़ दिया.”

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