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मध्य प्रदेश में अभी इनकम टैक्स की रेड का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि राज्य सरकार की आर्थिक अपराध शाखा यानी इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने ई-टेंडरिंग घोटाले में एफआईआर दर्ज कर ली है। कथित तौर पर यह घोटाला शिवराज सरकार के समय हुआ था।

इकोनॉमिक ऑफेंस विंग के डीजी के.एन. तिवारी ने बताया कि राज्य सरकार के 5 विभागों के 9 टेंडरों के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ करके कंपनी विशेष को फायदा पहुंचाया गया। इन 5 विभागों में मध्य प्रदेश जल निगम, पीडब्ल्यूडी, जल संसाधन विभाग, मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम और पीडब्ल्यूडी का पीआईयू विभाग शामिल हैं।

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इकोनॉमिक ऑफेंस विंग के डीजी के मुताबिक करीब 3 हज़ार करोड़ के ई-टेंडरिंग घोटाले में नई दिल्ली के कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें पाया गया कि ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ करके कुछ कम्पनियों को लाभ पहुंचाया गया।

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तिवारी ने बताया कि मामले में मध्य प्रदेश सरकार के अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों के अलावा 7 कम्पनियों के डायरेक्टर्स, अज्ञात राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स के खिलाफ आईपीसीसी की धारा 120 (बी), 420, 468 और 471 के अलावा आईटी एक्ट-2000 की धारा 66 और भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) 2018 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जानकारी के मुताबिक जल निगम में 1800 करोड़, सड़क विकास निगम में 8 करोड़, लोक निर्माण विभाग में 14 करोड़, जल संसाधन विभाग में 1135 करोड़, पीआईयू में 15 करोड़ का ई टेंडरिंग घोटाला हुआ है।

बता दें कि जल निगम की मंत्री कुसुम महदेले थीं, जबकि जल संसाधन विभाग के मंत्री नरोत्तम मिश्रा थे। वहीं सड़क विकास निगम, लोक निर्माण विभाग, पीआईयू के मंत्री रामपाल थे। इस तरह 5 विभागों के कुल 9 टेंडर में 3 हजार करोड़ का घोटाला सामने आया है।

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