मणिपुर के थउबल सीट से मानवाधिकार कार्यकर्ता और पीपुल्स रिसर्जेजेंस एंड जस्टिस अलायंस (पीआरएजेए) की उम्मीदवार इरोम शर्मिला ने चुनाव हारने के बाद राजनीति से संन्यास ले लिया हैं.

मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रही शर्मिला को महज 90 वोट मिले हैं जो नोटा (143) से भी कम हैं. शर्मिला ने मणिपर से अफ्स्पा हटाने को लेकर अपना 16 वर्षों का अनशन पिछले साल समाप्त करते हुए राजनीति में प्रवेश किया था.

शनिवार को मणिपुर विधानसभी के लिए आए चुनाव नतीजों में कांग्रेस को 27, भाजपा को 22, अन्य को 10 और टीएमसी को 1 सीट मिली है. राजनीति में आई इरोम के लिए यह अनुभव बेहद खराब रहा और हार के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं भविष्य में कोई चुनाव नहीं लड़ूगीं.

उन्होंने कहा कि आफस्पा के खिलाफ मेरी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी. उन्होंने कहा, मुझे नतीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता. यह लोगों की सोच पर निर्भर है. वह कहती हैं कि इन चुनावों में तमाम राजनीतिक दलों ने खुल कर बाहुबल और धनबल का इस्तेमाल किया है.

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