मध्य प्रदेश एटीएस द्वारा बुधवार को राज्य में पाकिस्तानी जासूसों के मोड्यूल का भंडाफोड़ के साथ ही गिरफ्तारी करने के बाद रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं. आईएसआई के लिये काम करने वाले इन 11 एजेंटों में से 2 का रिश्ता भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा हुआ हैं. अब एक और नया खुलासा हुआ हैं. इनमे से एक बजरंग दल का कार्यकर्ता हैं.

सतना से एटीएस द्वारा गिरफ्तार किया गया बलराम बजरंग दल कार्यकर्त्ता हैं. उसने बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं के भी बैंक खातें खोल रखे थे. जिनमें पाकिस्तान की तरफ से आये पैसे जमा हुआ करते थे. बलराम के साथ करीब 46 लोग जुड़े हुए हैं. जो इसी पुरे नेटवर्क में शामिल थे.

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बलराम ने इसी मामले में सतना के दो डॉक्टरों के शामिल होने की बात कबूली हैं. इनके बैंक खातों में आईएसआई की और से विदेशों से पैसा जमा हुआ हैं. इस मामले में बलराम के भाई विक्रम को भी हिरासत में लिया गया है और उससे  भी इंटेलीजेंस पूछताछ कर रही है. पुलिस को आशंका है कि विक्रम को बलराम के इन कारनामों की जानकारी होगी.

याद रहें गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से दो बीजेपी के कार्यकर्ता हैं. भोपाल का रहने वाला ध्रुव सक्सेना भारतीय जनता युवा मौर्चा की आईटी सेल का संयोजक है. जो बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का सबसे करीबी सहयोगी बताया जा रहा हैं. इसके अलावा उसके राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भोपाल महापौर आलोक शर्मा, भोपाल सांसद आलोक संजर के साथ भी करीबी रिश्तें हैं.  वह कई बार इनके साथ मंच साझा कर चुका है. वहीँ दूसरा आरोपी जीतेन्द्र जो ग्वालियर के रहने वाला हैं. जितेन्द्र के भाई की पत्नी ग्वालियर में पार्षद है.

गुरुवार को प्रेस कांन्फ्रेंस में एटीएस चीफ संजीव शमी ने कहा कि ये लोग इंटरनेट कॉल को सेल्युलर कॉल में ट्रांसफर कर देते थे. इससे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स की आइडेंटिफिकेशन नहीं हो सकती थी. आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए टेलीफोन एक्सचेंज ग्वालियर, भोपाल और जबलपुर में मिले हैं. ये लोग पैरेलल टेलीफोन एक्सचेंज चलाते थे. सभी पर देशद्रोह और इंडियन टेलीग्राफ एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.

शमी के अनुसार, नवंबर 2016 में जम्मू से सतविंदर और दादू को गिरफ्तार किया गया था. सतविंदर पाक हैंडलर्स के कहने पर मिलिट्री इन्फॉर्मेशन इकट्ठा कर पाक हैंडलर्स को दे रहा था. सतविंदर के अकाउंट में पैसे सतना का बलराम डिपॉजिट करता था.

इन एजेंटों को पकड़ने में केंद्रीय टेलिकॉम मंत्रालय की टीईआरएम (टेलिकॉम एनफोर्समेंट रिसोर्स एंड मॉनिटरिगं) सेल ने एटीएस की मदद की है. जनवरी में यूपी एटीएस ने 11 लोगों को इसी तरह का अवैध टेलिकॉम एक्सचेंज चलाने के मामले में गिरफ्तार किया था.

यूपी एटीएस द्वारा दिल्ली के महरौली इलाके से गिरफ्तार किए गए गुलशन सेन से ही मप्र में आईएसआई एजेंट होने की जानकारी हाथ लगी थी. सेना से जुड़ी जानकारियां पाकिस्तान भेजने का खुलासा होने के बाद यूपी एटीएस ने जम्मू-कश्मीर मिलेट्री इंटेलीजेंस यूनिट को इसकी जानकारी दी थी. जिसमें 24 से ज्यादा सेना के कर्मचारियों को इस तरह के फोन आने की बात सामने आई.

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