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गुजरात के पाटन ज़िले के कलेक्टर कार्यालय परिसर में ख़ुद को आग लगाने वाले दलित कार्यकर्ता की शुक्रवार रात मौत हो गई. जिसके बाद  सैकड़ो स्थानीय लोगों ने शनिवार को गुजरात के गांधीनगर सिविल अस्पताल के बाहर जमकर प्रदर्शन किया.

ध्यान रहे 61 वर्षीय वानकर ने दलितों को भूमि आवंटन में सरकार द्वारा कथित विलंब के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए गुरुवार की दोपहर कलेक्टर ऑफिस के सामने आत्मदाह कर लिया था. इलाज के लिए उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां शुक्रवार को रात 10 बजे करीब वानकर की मौत हो गई.

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ऐसे में मृतक के परिवार से मिलने पहुंचे भारतीय जनता पार्टी के विधायक करसन सोलंकी को अस्पताल में विरोध का सामना करना पड़ा है. जिसके चलते उन्हें वापस उलटे पैर लोटना पड़ा. इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

वानकर भूमिहीन दलित खेतिहर मजदूर हेमाबेन के लिए लड़ रहा था. हेमाबेन ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने साल 2013 में उससे 22,236 रुपये तो लिए लेकिन उसे भूखंड नहीं दिया. उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने बताया कि भूमि परिवार के सदस्य के नाम स्थानांतरित कर दी जाएगी.

पटेल ने कहा कि हम उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में एक न्यायिक आयोग बनाएंगे या एक जांच दल बनाएंगे जो कि जांच करेगा. यह कदम परिवार के फैसले का हिस्सा होगा. दोषियों के खिलाफ हम कड़ी कार्रवाई करेंगे.

उन्होंने यह भी कहा कि परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी, परिवार को अजा अजजा (अत्याचारों की रोकथाम) कानून के तहत आठ लाख रुपये दिए जाएंगे. इसमें से चार लाख रुपये तत्काल दे दिए जाएंगे.