आज़मगढ़: अपने गनर को साईकिल पर बैठाकर घुमने वाले ईमानदारी की मिसाल आजमगढ़ के 6 बार के विधायक आलम बदी को हार्ट अटैक पड़ा है. उनको सीरियस हालत में लखनऊ के अस्पताल में भर्ती कर दिया. उनकी हालत अभी सीरियस बनी हुई है. फिलहाल इलाज़ किया जा रहा है.

आजमगढ़ शहर की गलियों में वो रहता है, उसका काफी परिवार बड़ा है, सब साथ हैं. इलाके में उसकी साख है, लेकिन उसका रसूख उसके रहन-सहन में नदारद है. हां उसका अंदाज़ बताता है कि वो वाकई आपका एमएलए है, नाम है आलम बदी.

अपने ईलाके में मशहूर बदी साहब जीता जागता ईमानदारी का उदहारण है. किसी ज़माने में बदी साहब के पास एक पुरानी अम्बेसडर कार हुआ करती थी जो चलते चलते कहाँ रुक जाए किसी को पता नही होता है, वैसे आजकल एक पुरानी बोलेरो है लेकिन पेट्रोल का मसला होने के कारण वो बेहद कम ही चलती नज़र आती है. कहीं जाने के लिए बदी साहब परिचितों के साथ, सरकारी बस में या लिफ्ट मांगकर काम चलाते है. बदी साहब के छह बेटे है जिनमे से तीन छोटे-मोटे काम के सिलसिले में दुसरे शहरों में है, सबसे बड़े बेटे महज 15 हज़ार रुपये महीने की प्राइवेट नौकरी करते हैं. दूसरे बेटे की फर्नीचर की छोटी सी दुकान है, जिससे बस गुजर बसर ही हो पाता है.

आजकल चुनाव के मौसम में वो दुकान बंद कर पिता के साथ प्रचार में जुटे हैं. छोटे बेटे पीए के तौर पर आलम बदी के साथ रहते हैं, लेकिन मजाल है कि, कोई भी आदेश या काम वो बिना बदी साहब के कर लें. उनका काम सिर्फ बदी साहब का आदेश मानने का होता है, वो सिर्फ फ़ोन मिलाते हैं, बात खुद बदी ही करते हैं.

एक बार जब एक न्यूज़ चैनल का रिपोर्टर बदी साहब से मिलने गया तो बदी साहब अपने घर में झाड़ू लगाते हुए मिले और रिपोर्टर को मना किया की झाड़ू लगाने के विजुअल मत लो यह तो मेरा निजी काम है.

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