Wednesday, January 19, 2022

CAA विरोध: उमरा के लिए मक्का में मौजूद शख्स को बनाया मुलजिम

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नागरिकता कानून को लेकर उत्तर प्रदेश में हुए विरोध प्रदर्शनों को लेकर उत्तर प्रदेश की पुलिस की दमनकारी कार्रवाई पहले ही सवालों के घेरे में है। अब पुलिस की और से किए गए मुकदमे भी फर्जी साबित हो रहे है। पुलिस ने पहले ही कुछ ऐसे लोगों को पाबंद करने का नोटिस दिया है जो सालों पहले म’र चुके हैं या 90-95 साल के हैं और बिस्तर से उठ तक नहीं सकते हैं।

अब एक ऐसा मामला सामने आया है। जो पुलिस की कार्यप्रणाली को समझने के लिए काफी है कि पुलिस किस तरह से झूठे मामले दर्ज कर रही है। ताजा मामला मामला बहराइच का है। यहाँ के रहने वाले सुलेमान उमरा करने के लिए सऊदी अरब गए हुए थे और 20 दिसंबर को सऊदी अरब के मक्का शहर में उमरा कर रहे थे। लेकिन पुलिस के मुताबिक ठीक उसी वक्त वह बहराइच में उपद्रवी भीड़ का हिस्सा थे। उन पर दर्ज एफआईआर में आरोप है कि वह जुमे की नमाज के बहाने मस्जिद में जमा हुए।धारा 144 तोड़ कर जुलूस निकाला। मोदी-योगी मु’र्दाबाद के नारे लगाएय पुलिस की ह*त्या की कोशिश की। लिहाजा उन पर कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

उधर, बहराइच के रहने वाले सुलेमान खान का कहना है कि किसी वजह से पुलिस को गुमराह करके मेरा नाम भी एफआईआर में डाल दिया गया है, लिहाजा मैं पुलिस प्रशासन, सीओ साहब और कप्तान साहब से उम्मीद करता हूं कि मेरा नाम उसमें (एफआईआर) से निकाल दिया जाएगा। बता दें कि सुलेमान के पासपोर्ट पर 12 दिसंबर को देश छोड़ने और 28 दिसंबर को भारत वापस आने का इमीग्रेशन का मुहर भी लगा है।

मामले में बहराइच के एसपी सिटी अजय प्रताप सिंह का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति उपद्रव नहीं कर रहा था और उसका नाम किन्ही कारणों वश सूची में है तो उसका भली-भांति परीक्षण किया जाएगा। अगर वह व्यक्ति मौके पर नहीं रहा है और इस बात के पर्याप्त प्रमाण पाए जाएंगे तो उसका नाम निश्चित रूप से आरोप पत्र में नहीं होगा। दूसरी तरफ फिरोजाबाद शहर में आईपीसी की धारा 107/116 के तहत जिन लोगों को शांति बनाए रखने के लिए पाबंद किया गया है, उसमें से एक बन्ने खान को भी पाबंद किया गया है, जो 6 साल पहले गुजर गए हैं।

इसके अलावा फिरोजाबाद में ही 93 साल के फसाहत मीर को पाबंद किया गया है। फसाहत चलने-फिरने में असमर्थ हैं और अपने बिस्तर से उठ भी नहीं पाते। बता दें कि यूपी में हुए विरोध-प्रदर्शन के हालात को संभालने के दौरान यूपी पुलिस पर मनमानी करने और तोड़फोड़ करने के आरोप लग रहे हैं। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन गयूर उल हसन रिज़वी ने भी यूपी में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस को कठघरे में खड़ा किया है।

उनका कहना है, “नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और भारतीय राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध के दौरान मुस्लिम  युवकों पर यूपी पुलिस ने ज्यादती की है। बेकसूर लड़के पुलिस कार्रवाई का शिकार हुए हैं।” रिज़वी ने कहा कि बेकसूर युवकों की रिहाई के लिए मैंने गृह सचिव और डीजीपी, यूपी से मिलकर एसआईटी का गठन किए जाने का सुझाव दिया है। मैं लगातार दोनों लोगों के संपर्क में हूं।

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