कुछ दिन पहले, पैथोलॉजिस्ट मोहम्मद खालिद (55) को मारवाड़ी सहाय समिति से एक असामान्य कॉल आया। जिसमे कहा गया कि झारखंड की राजधानी में हिंदू कोविड पीड़ितों के शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए एक व्यक्ति की व्यवस्था करें।

समिति के सदस्य खालिद को फिर से याद किया गया। दरअसल वे बीते कुछ दिनों से  कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार कर रहा कल्लू गायब था। कल्लू तीन दिन पहले बिना सूचना के भाग गया।। समिति के अध्यक्ष प्रदीप राजगढि़या के बुलावे पर कोरोना से मृत लोगों के अंतिम संस्कार के लिए हजारीबाग से खालिद रांची पहुंचे।

जिला प्रशासन हरमू स्थित विद्युत शवदाह गृह में कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार कराता है। अब तक यहां 60 से अधिक लोगों का अंतिम संस्कार कराया गया है। दरअसल कोई भी कोरोना से संक्रमित मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार नहीं करना चाहता है।

परेशानी से जूझ रहे जिला प्रशासन व नगर निगम की मदद के लिए हजारीबाग के खालिद आगे आए। मंगलवार को खालिद ने इस शवदाहगृह में पांच कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार विधि-विधान के साथ किया। खालिद अब तक हजारों लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करवा चुके हैं।

सड़क दुर्घटना में मृत अनजान व्यक्ति हो या अस्पतालों के मोर्चरी में सड़ रहे शव, ऐसे लाशों का अंतिम संस्कार करने के लिए लोग इन्हें ही याद करते हैं। झारखंड के किसी भी मोर्चरी में जब लावारिस लाशों की संख्या काफी बढ़ जाती है तो खालिद को ही प्रशासन बुलावा भेजता है।

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