silverton tower
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गुरुग्राम में एक बहुत ही अजीबों-गरीब मामला सामने आया है. जिसमें गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड स्थित सिल्वरटन टावर मामले में सेक्टर 50 पुलिस ने टाउन ऐंड कंट्री प्लैनिंग (टीसीपी) डिपार्टमेंट ने बिल्डिंग प्लान, ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट की मांग की है. इस 7 मंजिला बिल्डिंग में प्रस्तावित 24 कॉमन टॉइलट्स के बजाय पांचवें फ्लोर पर सिर्फ एक टॉइलट ही बनाया है. आरोप है कि बाकी टॉइलटों की जगहों पर ऑफिस बनाये और उन्हें बेच दिया गया.
अब इस मामले में कोर्ट में याचिका दी गई है. जिसकी सुनवाई अगले हफ्ते होगी. पार्श्वनाथ एग्जॉटिका निवासी यश मनोज हांडा ने बताया कि सेक्टर 50 स्थित सिल्वरटन टावर में ऑफिस स्पेस खरीदा गया था. यहां काम शुरू करने के बाद उन्हें पता चला कि 7 मंजिल की बिल्डिंग में सिर्फ एक कॉमन टॉइलट है. जिसे सुनकर वह हैरान रह गए थे.

उन्होंने आगे बताया कि, इस बिल्डिंग में करीब एक हजार कर्मचारी काम करते हैं और इन सब कर्मचारियों के लिए सिर्फ एक ही टॉयलेट है. हर कर्मचारी को पांचवे फ्लोर पर जाकर ही टॉइलट इस्तेमाल करना पड़ता है. मनोज ने टीसीपी डिपार्टमेंट से पूछताछ की तो पता चला कि बिल्डिंग प्लान में 24 टॉइलट्स को मंज़ूरी दी गयी थी. यहां 23 कॉमन टॉइलटों की जगह पर बिल्डर ने ऑफिस यूनिट तैयार किया और उसे बेच डाला.

उन्होंने यह भी बताया कि, नियमों के मुताबिक किसी भी बिल्डिंग को कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने से पहले टीसीपी के अधिकारी पूरी बिल्डिंग की पैमाइश करते हैं. उनका आरोप है कि तत्कालीन एसटीपी, डीटीपी, एटीपी और जूनियर इंजिनियर की गड़बड़ी की वजह से टॉयलेट पर कोई ध्यान नहीं दिया गया.

इस मामले की शिकायत सीएम विंडो, टाउन ऐड कंट्री प्लैनिंग डिपार्टमेंट और पुलिस से की थी. शिकायत पर डीटीपीई राजेंद्र टी शर्मा ने एक साल पहले जगह का मुआयना किया था और जांच के दौरान आरोप की पुष्टि की थी. जांच के बाद उन्होंने इस मामले में टीसीपी डायरेक्टर ऑफिस से कुछ ड्रॉइंग मंगवाई थी, जो अभी तक नहीं मिल पायी है. इस वजह से जांच नहीं हो पा रही है और कार्रवही रुकी हुई है.
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