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महाराष्ट्र में किसानों की खुदकुशी के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे है। राज्य की बीजेपी सरकार के विकास के दावों के उलट रोजाना 7 किसान आत्महत्या कर रहे है। बीते 6 महीनों मे 1307 किसान खुदकुशी कर चुके हैं।

जनवरी से लेकर जून तक 2018 के आकड़ों के अनुसार, 1307 किसानों ने आत्महत्या की। पिछले वर्ष जनवरी से जून के बीच किसानों की खुदकुशी के 1398 मामले सामने आए थे। ये आकड़े महाराष्ट्र सरकार की कर्जमाफी की घोषणा के बाद के है।

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आंकड़े के मुताबिक मराठवाड़ा क्षेत्र में इस वर्ष 477 किसानों की खुदकुशी के मामले सामने आए हैं जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 454 था। सीएम देवेंद्र फडणवीस के  विदर्भ क्षेत्र में इस वर्ष भी सबसे अधिक किसानों ने खुदकुशी की। यहां अब तक 598 किसानों ने खुदकुशी की है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष के मुकाबले 58 कम है।

सरकार की कर्जमाफी की बात की जाए तो सरकार ने अभी तक 77.3 लाख अकाउंट में से 38 लाख किसानों को भुगतना किया है। किसान संगठनों का मानना है कि जब तक फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक किसानों की आमदनी में कोई भी बढ़ोतरी नहीं होगी।

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इस बीच, राज्य में खरीफ बुवाई के मौसम की शुरुआत के साथ किसान कर्ज को लेकर परेशान हैं। दरअसल, फसल कर्ज में भी भारी गिरावट देखी जा रही है। 2017-18 के मुकाबले आंकड़ों में 40 प्रतिशत गिरावट आई है। बैंक फसलों के लिए कर्ज नहीं दे रहा है, क्योंकि अभी तक पुराने कर्ज चुकाए नहीं गए हैं।

किसान कार्यकर्ता विजय जवांधिया का यह भी कहना है कि समर्थन मूल्य के तहत दालों की सरकारी खरीद कम हुई है। सरकार के हालिया ऐलान से किसान संतुष्ट नहीं हैं, जिसमें तुअर दाल और चने पर 1000 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी दी गई है। मंडी में तुअर दाल 3500 रुपये क्विंटल बिक रहा है और 1000 सब्सिडी जोड़ने के बाद भी 4500 हो रहा है। जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य 5450 रुपये है. किसान को सब्सिडी से भी फायदा नहीं है।

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