Tuesday, August 3, 2021

 

 

 

CAA विरोध: यूपी पुलिस नहीं कर सकी सबूत पेश, बिजनौर हिंसा के 48 आरोपियों को मिली जमानत

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नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में प्रदर्शन के दौरान नगीना में हुई हिं*सा में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव पांडेय ने 48 आरोपियों की जमानत दे दी है।उन्हें 40-40 हजार रुपये के दो जमानती और इसी राशि का निजी मुचलका दाखिल करने पर जेल से रिहा करने के आदेश दिए हैं।

अदालत ने पुलिस के दावों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा कोई सबूत नहीं दिखाया जिससे पता चले कि आरोपी गोलीबारी या आगजनी में लिप्त थे या पुलिस ने आरोपियों से कोई हथियार जब्त किया हो या कोई पुलिसकर्मी गोली से घायल हुआ हो।बता दें कि, सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान बिजनौर उत्तर प्रदेश में सबसे बुरी तरह से प्रभावित जिलों में से एक था।

जज ने सुनवाई के दौरान कहा कि FIR में भीड़ के पुलिस पर गोली चलाने की बात कही गई है लेकिन हथियार मिलने के कोई सबूत नहीं दिए गए। भीड़ से किसी ने पुलिस पर गोली चलाई, इसके सबूत नहीं हैं। FIR में भीड़ पर निजी, सरकारी गाड़ियों और दुकानों में आगजनी का आरोप लगाया गया है लेकिन पुलिस के पास इसके सबूत नहीं हैं। सरकारी गाड़ियों में तोड़फोड़ की पुलिस रिपोर्ट दी गई लेकिन रिपोर्ट हिंसा के 20 दिन बाद तैयार की गई।

सरकारी वकील के मुताबिक, हिंसा में 13 पुलिस वाले घायल हुए लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों को मामूली चोट की बात सामने आई है। अदालत ने कहा कि सरकारी वकील कोर्ट में इस बात के सबूत पेश करने में नाकाम रहे कि भीड़ की ओर से पुलिस पर फायरिंग की गई थी, साथ ही भीड़ ने किस तरह के नारे लगाए और कौन इस प्रदर्शन की अगुवाई कर रहा था।

न्यायालय ने आरोपी अनस, आसिर, मोहम्मद शुएब, इसरार, सैफ अली, मेहराज, फहीम, शाहरुख, अनस, इकरामुद्दीन व आरिफ, एजाज, शाकिर, शाहवाज सहित 43 आरोपियों की इस घटना में जमानत स्वीकार की है। अदालत ने जमानत आदेश में यह भी शर्तें लगाई हैं कि इस तरह का पुन: अपराध नहीं करेंगे, साक्ष्यों को भी प्रभावित नहीं करेंगे, विवेचना में सहयोग करेंगे, कोर्ट में सुनवाई के लिए हर तारीख पर उपस्थित होंगे।

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