लखनऊ: योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंगलवार को 5 लाख 12 हजार 860 करोड़ रुपये का बजट पेश किया जिसे यूपी के इतिहास का सबसे बड़ा बजट बताया जा रहा है। यह पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 के मुकाबले 33,159 करोड़ रुपये ज्यादा है।

योगी सरकार के चौथे बजट में अल्पसंख्यक कल्याण (Minority Welfare) के तहत प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के लिए 783 करोड़ रुपये और मान्यता प्राप्त मदरसों और मकतबों के लिए 479 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हालांकि पिछले साल पेश हुए बजट में अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्रों को छात्रवृत्ति योजना हेतु 942 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई थी, जबकि अरबी-फारसी मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए 459 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। इसके साथ ही सरकार ने तलाकशुदा महिलाओं को प्रतिमाह 500 रूपये पेंशन देने की भी घोषणा की है।

हालांकि इस बजट में धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष फोकस किया गया है। अयोध्या पर योगी सरकार लगभग 600 करोड़ रुपए खर्च करेगी जिसमें 500 करोड़ एयरपोर्ट, 85 करोड़ पर्यटन से जुड़ी सुविधाएं व तुलसी स्मारक भवन के लिए 10 करोड़ की व्यवस्था की गई है। बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए बजट में 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। इसके अलावा बनारस में ही संस्कृति केंद्र की स्थापना के लिए 180 करोड़ दिये गये हैं।

पूर्व सीएम व समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने इस बजट को सबसे बड़ा जुमला बताया है। अखिलेश के मुताबिक, यूपी का पर्सेप्शन इस सरकार में बेहद खराब हुआ है। अब यूपी की पहचान किसानों की आत्महत्या, पुलिस बर्बरता, बढ़ती बेरोजगारी से होती है। सीएम ‘गो’ली और बोली’ जैसे बयान देते हैं। बजट में किसान व नौजवानों के लिए कुछ नहीं है। रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

वहीं कांग्रेस के यूपी चीफ अजय लल्लू ने बजट को आंकड़ों की बाजीगरी बताते हुए युवाओं और किसानों के लिए घोर निराशाजनक और धोखा करार दिया है। युवा बेरोजगारों जिनकी तादात पिछले दो वर्षों में बढ़ी है उन्हें नये रोजगार देने के बजाए आज के बजट में रिटायर्ड शिक्षकों को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में नौकरी देने की घोषणा बेरोजगार युवाओं के साथ विश्वासघात है। किसान, युवा व महिलाओं के जले पर नमक छिड़कने जैसा ये बजट है।

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