मेरठ: उत्तर प्रदेश में जीएसटी में बड़ा घोटाला सामने आया है। यूपी के गाजियाबाद, नोएडा की दो फर्मों ने दिल्ली की फर्म के साथ मिलकर करीब 300 करोड़ से अधिक के टैक्स की चोरी की। इस मामले में एक सीए, एक वकील और उनके सहयोगी को गिरफ्तार किया गया।

तीनों को मंगलवार को मेरठ में स्पेशल सीजेएम की अदालत में पेश किया गया। जहां से न्यायिक हिरासत में तीनों को जेल भेज दिया गया।  गिरफ्तार होने वालों में विकल्प जैन, रंजीत सिंह और सुधीर सिंह है। टीम ने इस कंपनी के दिल्ली, गाजियाबाद, साहिबाबाद, नोएडा और मेरठ की शैल कंपनियों पर छापे मारे हैं।

डायरेक्टर जनरल आफ जीएसटी इंटेलिजेंस के विवेचनाधिकारी ऐश्वर्य आत्रेय और देवेंद्र सिंह ने अदालत को बताया कि गाजियाबाद की एक फर्म बनाकर 297 करोड़ की ई बिल के जरिए फर्जी लेन-देन कर करीब 50 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की गई है। गिरोहबंद तरीके से इस काम को अंजाम दिया गया। गिरोह के सदस्यों ने नोएडा में अपना एक ऑफिस बना रखा था। जहां से ई-बिल और फर्जी रसीद तैयार कर करीब 20 कंपनियों के नाम पर जीएसटी टैक्स की चोरी कराते थे।

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कंपनी ने फर्जी बिलों का खेल पिछले दस माह में सरकार से 24 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले लिया। जिसके बाद जीएसटी इंटेलिजेंस विभाग ने साहिबाबाद स्थित कार्यालय के अलावा मोदीनगर, गाजियाबाद और दिल्ली में छापेमारी कार्रवाई कर कम्प्यूटर, लेपटॉप और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। जांच में पता चला कि जीएसटी के तहत क्रेडिट दिखा किस तरह से टैक्स बचाना है इसकी पुरी प्लानिंग सुधीर ने की। जिसके तहत उसे भी गिरफ्तार किया गया।

लोक अभियोजन अधिकारी लक्ष्य कुमार सिंह ने अदालत को बताया कि इन्होंने सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की चोरी कर हानि पहुंचाई है। इस गंभीर क्राइम की जांच अभी चल रही है। इनको जमानत नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि आरोपियों के वकील राहुल जैन ने अदालत से कहा कि आरोपियों ने कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया है और न ही कोई चोरी की है।

वकील ने कहा कि जो आरोप इन लोगों पर लग रहे हैं वह इनके दफ्तर के कर्मचारियों की करतूत हो सकती है। स्पेशल सीजेएम रामलाल ने सुनवाई के बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

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