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असम में NRC का मुद्दा भारतीय बनाम विदेशी न होकर बल्कि अब मूल असमी का रूप धारण करता दिख रहा है। दरअसल, NRC में नाम न होने पर भारत के दूसरे राज्यों के लोगों को असम से निकाला जा रहा है।

ताजा मामला करीब 300 बिहारी परिवारों को निकालने का सामने आया है। इस दौरान जो अपने घर वापस नहीं लौटे, उनमें से तीन लोगों को गिरफ्तार पर कर लिया है। सभी ग्रामीण गोपालगंज के बरौली, सिधवलिया, मांझा और बैकुंठपुर प्रखंड के रहने वाले हैं।

गोपालगंज के जगरनाथा के रहने वाले 55 वर्षीय केदार भगत ने बताया कि उनके दादा, परदादा 70 साल पहले मजदूरी के लिए असम के तिनसुकिया चले गए थे। वहीं पर थोड़े-थोड़े पैसे जोड़कर जंगलों में अपना आशियाना बना लिया। अब केदार भगत भी वहीं रहकर मजदूरी करते हैं और अपना परिवार चलाते हैं, लेकिन असम सरकार ने उनसे भारतीयता का प्रमाण पत्र मांगा है।

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केदार भगत ने खुद को देश का नागरिक साबित करने के लिए अपने पुश्तैनी दस्तावेज वहां के प्रशासन को सौंपे लेकिन उसके बावजूद उन्हें वहां से खदेड़ दिया गया है। केदार की तरह रविन्द्र रविन्द्र के दादा भी वहां कई साल पहले मजदूरी करते थे। अपने दादा के साथ रविन्द्र रहकर वहां मजदूरी करने लगे।

रविन्द्र ने भी अपनी जमीन से लेकर देश की नागरिकता से सम्बंधित सभी कागजात वहां की सरकार को सौंप दिए, इसके बावजूद रविन्द्र को वहां से गोपालगंज वापस भेज दिया गया। रविन्द्र अपनी बातों को असम सरकार से लेकर बिहार सरकार तक पहुंचाने के लिए स्थानीय पूर्व विधायक व जदयू प्रदेश महासचिव मंजीत सिंह से गुहार लगा रहे हैं।

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