Friday, September 17, 2021

 

 

 

राजकोट: सरकारी अस्पताल में 134 की बच्चों की मौत, सीएम विजय रुपानी बिना जवाब दिए निकले

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गुजरात के राजकोट के सरकारी अस्पताल में पिछले एक महीने में 134 की बच्चों की मौत हुई। इसके अलावा अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भी एक माह में 196 बच्चों की मौत होने का मामला सामने आया है। लेकिन राज्य के सीएम विजय रुपाणी इन मौतों पर रिपोटर्स के सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं बल्कि चुपचाप वहां से निकल जा रहे हैं।

दरअसल, मीडिया ने जब सीएम रुपाणी से बच्चों की मौत के मामले पर सवाल किया तो वह चुप्पी साधते हुए बिना कुछ प्रतिक्रिया दिए चले गए। वीडियो में नजर आ रहा है कि ‘मुख्यमंत्री विजय रुपाणी पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। इसी बीच एक पत्रकार ने उनसे राजकोट अस्पताल में हुए बच्चों की मौत से जुड़ा प्रश्न पूछ दिया। इस प्रश्न को सुनने के बाद चंद सेकेंड तक विजय रुपाणी वहां खड़े रहे और फिर अचानक ही वहां से बिना कुछ बोले ही चल दिए।’

इस बीच, उपमुख्यमंत्री व राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल ने रविवार को बच्चों की मौत होने की बात स्वीकार की और कहा कि राज्य में बाल मृत्यु दर कम होते होते 25 प्रतिशत तक है। राज्य सरकार इसमें भी कमी लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

नितिन पटेल ने बताया कि राजकोट में सिविल अस्पताल में दिसंबर में 111 और अहमदाबाद सिविल अस्पताल में 85 बच्चों की मौत हो गई है। बाल मृत्यु दर बहुत ही संजीदा मामला है। हम इसे राजस्थान के परिपेक्ष्य में नहीं देख रहे हैं। गुजरात सरकार बाल मृत्युदर एवं नवजात शिशुओं की चिकित्सा सुविधा पर पहले से ही विशेष बल दे रही है। यही कारण है कि मृत्यु दर क्रमशः कम होते-होते 25 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसे और भी कम किया जाएगा।

नितिन पटेल बताया कि बच्चों व प्रसूता महिलाओं की मृत्यू दर को रोकने के लिए सरकार निजी अस्पताल के बाल चिकित्सकों, विशेषज्ञों को 49 हजार रुपये प्रति महीने अदा करती है। उन्होंने बताया कि एनेमिक, कुपोषित, न्यूमोनिया व कम वजन के कारण नजजात बच्चों की मौत होती है।

उन्होंने कहा कि राजकोट सिविल अस्पताल में नवंबर में 846 प्रसूति हुई। इनमें से 281 को एसएनसीयू में दाखिल किया गया। प्राइवेट अस्पताल से 175 बच्चें भी दाखिल किए गए। इस प्रकार कुल 456 में से 71 बच्चों की मौत हो गई । यह 5.5 प्रतिशत है। दिसंब में 804 प्रसूति में 228 को एसएनसीयू में रखा गया। प्राइवेट अस्पताल से आए 160 के साथ कुल 388 बच्चों की चिकित्सा के दौरान 11 की मौत हो गई है। वहीं, अहमदाबाद सिविल अस्पताल में 85 बच्चों की मौत हुई है।

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