महाराष्ट्र में वर्ष 2015 से 2018 के दौरान करीब 12,021 किसानों ने आत्महत्या की। राज्य सरकार द्वारा शुक्रवार को विधान परिषद में यह जानकारी दी गई। राहत और पुनर्वास मंत्री सुभाष देशमुख ने विधानसभा में बताया कि इनमें 6,888 ऐसे मामले थे जो जिला स्तरीय समितियों की समीक्षा के बाद सरकारी सहायता के पात्र थे।

उन्होंने कहा कि अब तक 6845 किसानों के परिजनों को एक-एक लाख रुपये की आर्थक सहायता दी जा चुकी है। देशमुख ने कहा कि साल 2019 में जनवरी से मार्च के बीच 610 किसानों ने आत्महत्या की। इनमें से 192 आर्थिक सहायता के पात्र थे। इन 192 मामलों में से 182 किसानों के परिजनों को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि बाकी मामलों की पात्रता जानने के लिए समीक्षा की जा रही है। किसानों की कर्जमाफी को लेकर शुक्रवार को विधान परिषद में विरोधी पक्ष नेता धनंजय मुंडे ने सदन में वाशिम जिले के जामरूण जहांगीर गांव के रहने वाले अशोक ग्यानजू का मामला उठाया।

मुंडे ने कहा कि दो साल पहले ग्यानजू किसान परिवार को मुख्यमंत्री ने कर्जमाफी का सम्मानपत्र दिया था, लेकिन आज तक उनका कर्जमाफ नहीं हुआ है। वो इस समय विधानभवन परिसर में मौजूद है। इस दौरान मुंडे ने सभापति को सर्टिफिकेट का सबूत देते हुए कहा कि आपके परमिशन के बाद उस किसान को सदन में लाया जा सकता है। आज राज्य में ऐसे कितने ही किसान है, जिनका कर्जमाफ नहीं हुआ है।

इसके जबाब में सहकार मंत्री सुभाष देशमुख ने कहा कि विपक्ष नेता सरकार के खिलाफ गलत प्रचार कर रहे हैं। राज्य में दो लाख के भीतर जिन-जिन किसानों पर कर्ज था करीब -करीब उनके कर्ज माफ किए गए हैं। सहकार मंत्री के इस जबाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया, जिसे लेकर सभापति रामराजे निंबालकर ने सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित कर दी।

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