प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन के विरोध में करीब एक हजार किसानों ने गुजरात उच्च न्यायालय में मंगलवार को हलफनामा दायर कर परियोजना का विरोध किया है।

मुख्य न्यायाधीश आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति वी एम पांचोली की एक खंडपीठ जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने वाली 5 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इसके अलावा 1000 किसानों ने उच्च न्यायालय में अलग से हलफनामा देकर इस परियोजना का विरोध किया है।

किसानों ने हलफनामे में कहा कि वे नहीं चाहते कि परियोजना के लिए उनकी जमीन का अधिग्रहण किया जाए। किसानों ने यह भी कहा कि मौजूदा भू अधिग्रहण प्रक्रिया इस परियोजना के लिए भारत सरकार को सस्ती दर पर कर्ज मुहैया कराने वाली जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) के दिशानिर्देशों के भी विपरीत है।

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किसानों ने आरोप लगाया कि गुजरात सरकर ने बुलेट ट्रेन के लिये सितंबर 2015 में भारत और जापान के बीच समझौते के बाद भू अधिग्रहण अधिनियम 2013 के प्रावधानों को हलका किया और प्रदेश सरकार द्वारा किया गया संशोधन अपने आप में जेआईसीए के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।

उन्होंने अदालत को बताया कि न तो उनकी सहमति ली गई न ही भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई करते हुए उनसे कोई परामर्श किया गया। किसानों ने कहा कि अगर हाई कोर्ट से उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो वे लोग सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

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