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गुजरात के उना में गोरक्षा के नाम पर सताए गए दलित परिवारों ने आज हिन्दू धर्म त्याग दिया है. पीड़ित दलितों के एक समूह ने रविवार को हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया.

ऊना के मोटा सामढियाला में कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच दलितों ने हिन्दू धर्म छोड़कर ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली. इस दौरान पीड़ित परिवार समेत करीब 400 दलितों ने बौद्ध धर्म अपनाया.

पीड़ित दलित रमेश सरवैया ने कहा कि उनके साथ अब तक न्याय नहीं हुआ, जो आरोपी हैं वो जमानत पर रिहा हो गए हैं, यही नहीं सरकार ने जो वादा किया था, उसे भी अब तक पूरा नहीं किया गया है.

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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पीड़ित परिवार और बाकी दलितों ने धर्म परिवर्तन के दौरान कसम खाई कि वे हिन्दू देवी-देवताओं में विश्वास नहीं करेंगे और केवल बौद्ध धर्म की मान्यताओं को मानेंगे. धर्म परिवर्तन के बाद लोगों ने कहा कि यह उनका दूसरा जन्म है.

धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया में बौद्ध साधुओं प्राग्नरत्न, संघमित्रा और आनंद ने दलितों को दीक्षा दी. बता दें कि 11 जुलाई 2016 को रमेश सरवैया, भाई वसराम, अशोक और उसके चचेरे भाई बेचर को गोरक्षकों ने नग्न हालात में कार से बांधकर लोहे की राड से मारा था.

इस घटना को लेकर जमकर हंगामा मचा था. पुरे देश में दलितों ने आंदोलन किये थे. इस घटना की गूंज संसद तक में सुनी गई थी.

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