आज मुसलमानों में औरतों की आजादी और उनकी शिक्षा को लेकर तंज कसे जाते हैं और इसके लिए इस्लान धर्म को जिम्मेदार ठहराया जाता हैं. लेकिन दुनिया ये भूल जाती हैं कि इसी इस्लाम को मानने वाली मुस्लिम महिला ने ही दुनिया को पहली यूनिवर्सिटी दी.

“लेडी ऑफ़ फ़ेज़” के नाम से मशहूर फ़ातिमा वो पहली इंसान हैं जिन्होनें इस दुनिया की पहली यूनिवर्सिटी को कायम किया. यह यूनिवर्सिटी मोरक्को के शहर फ़ेज़ में क़ायम की गयी. “इस्लामिक गोल्डन ऐज” के दौरान बनी ये यूनिवर्सिटी आज भी शुमाली अफ़्रीका की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी है.

यूनिवर्सिटी की शुरुआत से ही इसमें केमिस्ट्री, मेडिसिन, मैथमेटिक्स, जियोलॉजी जैसे अलग-अलग विषयों पर तालीम दी जाती रही हैं. इस यूनिवर्सिटी के कायम होने के पीछे भी एक बहुत ही नेक मकसद था.

दरअसल, फ़ातिमा का जन्म तक़रीबन सन 800 में, तुनिशिया में हुआ. उनके वालिद का नाम मोहम्मद था और वे कुछ सालों के बाद फ़ेज़ चले आये, उस वक़्त फ़ेज़ काफ़ी मशहूर शहर माना जाता था. फैज के आने के बाद उनके पास धन की कोई कमी नहीं हुई.

उनके वालिद के इन्तेकाल के बाद उनके इसाले-सवाब के लिए फ़ातिमा और उसके परिवार ने इस धन को किसी नेक काम में ख़र्च करने के बारें में सोंचा. फ़ातिमा की बहन ने फ़ैसला किया कि वो एक मस्जिद बनवाई जिसे बाद में अन्दलुस मस्जिद के नाम से जाना गया.

वहीँ फ़ातिमा का ध्यान शिक्षा की और गया और उन्होंने सन 859 में “अल-क़रवीं यूनिवर्सिटी” (University of Al Qarawiyyin) बनवाने का फ़ैसला किया. सन 880 में उनका इंतिक़ाल हो गया लेकिन उनकी क़ायम की गयी यूनिवर्सिटी आज भी लोगों को तालीम का रास्ता दिखा रही है.


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