Wednesday, June 16, 2021

 

 

 

क्या सच में रोहिंग्या मुसलमान इंसानी मांस खाते है ? जानिये सच्चाई

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कोहराम न्यूज़ स्पेशल रिपोर्ट 

वैसे तो रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा पूरी दुनिया में छाया हुआ है लेकिन आजकल एक बेहद अजीब खबर उनके बारे में प्रचारित की जा रही है जिसमे उन्हें मानव मांस खाने वाला बताया जा रहा है. आज कोहराम न्यूज़ इसी खबर की पड़ताल करके आपके सामने रखेगा की यह खबर सच है या झूठ, क्या सच में रोहिंग्या मुसलमान इंसानी मांस खाकर अपनी भूख मिटाते है, क्या सच में बर्मा सरकार उन्हें इसीलिए देश से निकाल रही है क्योंकी उन्होंने वहां के बौधों को खाकर उनकी आबादी कम आकर दी और अब उन्हें भगाया जा रहा है. क्या दुनिया का कोई भी देश उन्हें इसीलिए पनाह नही दे रहा है क्योंकी उन्हें दर है की रोहिंग्या मुसलमान उनके बच्चो को खा जायेंगे.

वैसे आपको सुनने में यह बाते बेहद अजीब सी लग सकती है लेकिन ऐसी खबर सोशल मीडिया पर बड़ी तादात में वायरल की जा रही है की रोहिंग्या मुसलमान इंसानी मांस खाते है. वायरल की जा रही इन पोस्टों में कुछ फोटो लगाकर लिखा गया है की

“ये हैं रोहिग्या मुसलमानो की असलियत साक्षात नरपिशाच इंसानो की हत्या कर उनका मांस भक्षण करते है। म्यामार से इन्हें इसलिए ही भगाया है, सोचिये यदि हमारे देश मे इन्हें रुकने दिया तो क्या होगा। इनका पुरजोर विरोध होना चाइये वर्ना। ये इस देश मे आतंक मचा देंगे।
हर हर महादेव
प गौरव उपाध्याय उज्जैन

वैसे तो इस तरह की काफी पोस्ट वायरल की जा रही है जहाँ अलग अलग लोग भिन्न फोटो का इस्तेमाल करके यह साबित करने की कोशिश कर रहे है की रोहिंग्या मुसलमान इंसानी भक्षक है और उन्हें म्यांमार से इसी कारण भगाया जा रहा है.

आइये देखते है आखिर क्या सच है. इसमें जो फोटो इस्तेमाल किये गये है उनकी पड़ताल करते है.

इस वायरल मैसेज में एक फोटो इस्तेमाल किया गया हैे जिसमे इंसानी सिर दीवार के साहारे रखे गये है लेकिन आपको बताते चले की यह फोटो कम्पलीट नही है इस फोटो में गत्ते के एक टुकड़े पर सन्देश भी लिखा गया है जो सिरों के ठीक सामने है चूँकि उसपर साफ़ पढ़ा जा सकता है की यह फोटो ड्रग माफियाओं से सम्बंधित है इसीलिए उस सन्देश को बड़ी चालाकी से फोटोशॉप से कट कर दिया गया है. दरअसल इसमें जो लोग दिखाए गये है वो मक्सिको की जेल में हुई हिंसाओ में मारे गये थे और इन सभी का सम्बन्ध ड्रग माफिया गैंग से था. ना तो इनमे से किसी का सम्बन्ध रोहिंग्या से है और ना ही इनकी गर्दन इसलिए काटी गयी है की इन्हें पकाकर खाया जाए. लिंक देखें – :

http://www.borderlandbeat.com/2012/03/10-decapitated-heads-found-at.html

इसके बाद जो दूसरी फोटो इस मैसेज में दिखाई गयी है जिसमे साफ़ तौर पर देखा जा सकता है की कुछ लोग मानव शरीर को काट रहे है, दरअसल उस फोटो का सम्बन्ध थाईलैंड से है और यह मुसलमानों के बिलकुल विपरीत बौधों की एक प्रकार की धार्मिक क्रिया होती है जिसका नाम “Lang Pa Cha’ (लैंग पा चा), इस धार्मिक रिवाज के तहत जंगल की सफाई की जाती है अगर ऐसे में कोई अनजान मृत शरीर मिलता है तो उसके शरीर की एक-एक हड्डी को अलग करके साफ़ किया जाता है, जिसके लिए स्वंसेवक साथ रखे जाते है और पूरी प्रक्रिया मेडिकल स्टाफ की देख रेख में होती है. लिंक पर क्लिक करके आपको खुद सच का अंदाज़ा आ जायेगा https://www.documentingreality.com/forum/f10/field-dressing-man-23186/. सन 2009 में जब यह फोटो दुनिया के सामने आई थी तब इन्होने तहलका मचा दिया था. काफी लोगो ने थाईलैंड एम्बेसी को ईमेल के ज़रिये इन फोटोग्राफ की सच्चाई बताने के आग्रह किया और एक तरह की मुहीम चल पड़ी जिसे ‘मेतहुलु’ कहा गया. बाद में इनकी असलियत सामने आई थी की थाईलैंड के एक इलाके प्रन्चुबखीरी जगह के बौध लोग इस तरह की रीति रिवाज का पालन करते है. इसमें उन शरीर को साफ़ किया जाता है जो लावारिस अवस्था में मिलते है और उन्हें काट कर उनकी हड्डियाँ निकाल ली जाती है फिर उन्हें दफ़न किया जाता है. इस लिंक पर पूरी डिटेल पढ़ी जा सकती है – http://www.snopes.com/photos/gruesome/thaicannibals.asp

google में lang pa cha टाइप करने पर इस धार्मिक रिवाज की फोटो देखि जा सकती है

इसमें वायरल मैसेज में जो सबसे पहली फोटो दिखाई गयी है वो दरअसल एक न्यूज़ वेबसाइट irrawaddy.com  से ली गयी है जिसमे बहुत चालाकी के साथ वेबसाइट का वॉटरमार्क धुंधला कर दिया गया है जिससे की यह पता ना चल सके की यह फोटो कहा से आया है, दरअसल यह फोटो बांग्लादेश के शरणार्थी कैंप का है जहाँ ईद के अवसर पर क़ुरबानी का मांस वितरित किया जा रहा है,

हालाँकि फोटो बिलकुल भिन्न स्थिति का है लेकिन मैसेज में उसे इस तरह दिखाया गया है जिससे लगे की इंसानी मांस को मिल बाँट कर खाया जा रहा है.इसमें ठीक नीचे फोटो भी ईद-उल-अजहा का है जिसमे रोहिंग्या कैंप में हुई क़ुरबानी के मांस को साफ़ किया जा रहा है. इस फोटो को रिचर्ड पॉटर ने भी 2014 में शेयर किया था. चूँकि नफरत की जिस सौदागरों ने यह वायरल मैसेज बनाया है उन्होंने काफी चालाकी इस्तेमाल की है अधिकतर वो फोटो इस्तेमाल किये है जो google से डिलीट कर दिए गये थे. कोहराम न्यूज़ को इन फोटो ढूंढने के लिए google की कैश मेमोरी खंगालनी पड़ी.https://www.irrawaddy.com/photo/rohingya-camp-subdued-celebration-muslim-holiday.html यह उस उस खबर का लिंक जिसमे यह फोटो इस्तेमाल किया गया था लेकिन वेबसाइट ने यह पोस्ट डिलीट कर दी है तो google से यह फोटो भी डिलीट हो गया है चूँकि इसे अभी भी कैश मेमोरी में देखा जा सकता है इस लिंक पर क्लिक करके आप उसे देख सकते है. https://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:r4m10WxcnKkJ:https://www.irrawaddy.com/photo/rohingya-camp-subdued-celebration-muslim-holiday.html/attachment/evi009+&cd=1&hl=en&ct=clnk&gl=in

 

इन फोटो को देखने से साफ़ होता है की रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर बड़े पैमाने पर नफरत का खेल जारी है और उनके लिए मानव मांस खाने तक का झूठ बोला जा रहा है.

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