Monday, September 20, 2021

 

 

 

केंद्र के लिए सियासी खुदकुशी साबित होगा लैंड बिल?

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लैंड बिल विरोधी आम आदमी पार्टी की रैली के दौरान एक किसान की आत्महत्या को लेकर जो माहौल बना है वह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

भारत की आधी से अधिक जनसंख्या खेती से जुड़ी हुई है। साथ ही बिहार और उत्तर प्रदेश के लाखों टैक्सी चालक, मजदूर और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोग देश के अन्य बड़े शहरों में आजीविका कमाते हैं। लेकिन, जब फसल बोने या काटने का समय होता है तो वे शहरों से अपने-अपने घर लौट जाते हैं। खेती के दौरान इस्तेमाल होने वाले सामान जैसे यूरिया, बिजली और पानी की कीमत महंगी होने के कारण खेती में बहुत ही कम फायदा रह गया है। लोगों का खर्च खेती से निकलना बहुत ही मुश्किल हो गया है।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, बलिया का रहने वाले चंद्रभूषण मुंबई में टैक्सी चलाते हैं और घर पर महीने के खर्च के लिए पैसा भेजते हैं। उनके पास करीब 5 एकड़ भूमि है लेकिन उनका कहना है कि खेती से होने वाली आय से घर का खाना और बुनियादी जरूरतें ही बहुत मुश्किल से पूरी हो पाती हैं। चंद्रभूषण कहते हैं कि उन्होंने इस उम्मीद में मोदी को वोट दिया था कि उन जैसे लोगों के जीवन में सुधार आएगा।

उन्होंने कहा कि मोदी ने चुनाव के दौरान वादा किया था कि किसानों को उनकी लागत पर 50 फीसदी प्रॉफिट मार्जिन मिलेगा लेकिन उनका वादा पूरा नहीं हुआ। ऊपर से बेमौसम बारिश और कृषि उत्पाद की कीमतों में भारी गिरावट के कारण किसानों की स्थिति बिगड़ गई। मोदी सरकार ने अपने बजट में भी किसानों को कोई खास राहत नहीं दी।

इन सब कारणों से मोदी सरकार किसानों का भरोसा खोती जा रही है। संघ परिवार के ही संगठन जैसे भारतीय किसान संघ और स्वदेशी जागरण मंच भी मोदी सरकार के खिलाफ होते जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि किसानों की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। किसानों को अस्तित्व के संकट का सामना करना पड़ रहा है लेकिन मोदी सरकार औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के नाम पर भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर बैठी है।

विकास और रोजगार के अवसर पैदा करने के नाम पर इंडस्ट्री को लोन के भुगतान तक से छूट मिली है। बैंकों ने लाखों करोड़ रुपये का उद्योग जगत की कर्ज वसूली को अभी स्थगित कर दिया है लेकिन मोदी सरकार के दौर में किसानों को कोई राहत नहीं मिली। अगर इंडस्ट्री जगत को राहत मिल सकती है तो किसानों को क्यों नहीं? ऐसे कुछ सवाल हैं जो मोदी सरकार के लिए राजनीतिक आत्महत्या साबित हो सकते हैं।
खबर एनबीटी

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