यासिर अली

कोहराम न्यूज़ नेटवर्क – शब-ए-बरात बरकतों की रात है ये वो रात है जब मुसलमान की तौबा कुबूल की जाती है लेकिन जैसा की पिछले कई वर्षों से शब-ए-बरात को इबादत की रात की जगह मुस्लिम युवक स्टंट की रात मना रहे थे. यहीं नही शब-ए-बरात से काफी दिन पहले से स्टंट करने की तैयारियां शुरू होने लग गयी थी. दिल्ली की सड़कों पर धमाचौकड़ी मचाने वाले ये युवा अपनी जान तो खतरें में डालते ही है साथ साथ परिवार से लेकर प्रशासन तक की परेशानी का सबब बनते है.

इस तरह की हरकतों से हो रही परेशानी तथा मुस्लिम समुदाय की गलत छवि दुनिया के सामने जा रही थी जिसे देखकर जामिया नगर के निवासी यासिर अली ने इस शब-ए-बरात की रात कुछ ऐसा कारनामा किया जिसे लेकर प्रसाशन तारीफ करते नही थक रहा है.

यासिर अली, जंगे आज़ादी में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाली तंजीम खुदाई खिदमतगार से जुड़े है इस शब-ए-बरात पर मुस्लिम युवाओं को स्टंट करने से रोकने के लिए उन्होंने 8 टीमे बनायी, जिन्होंने दिल्ली में अलग अलग स्थानों पर मुस्लिम युवकों को स्टंट करने की बजाय मस्जिद में इबादत करने की गुज़ारिश की, युवाओ को इतने प्यार और सलीके से समझाया गया की उनके पास सिवाय मस्जिद में जाने के कोई चारा ना बचा

कोहराम न्यूज़ के रिपोर्टर ने उनका इंटरव्यू लिया, पेश है इंटरव्यू की कुछ खास बातें

अच्छे काम की मिली तारीफ

सवाल – अपने तथा अपनी तंजीम के बारे में बताएं?

जवाब – मैं यासिर अली मुकम्मल तौर पर गांव कुराना जिला हापुड़ उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं और अबुल फजल एंक्लेव जामिया नगर दिलली में रहकर ssc Competitive exam की तैयारी कर रहा हूं जहां तक हमारी तंजीम का सवाल है तो खुदाई खिदमतगार का आगाज खान अब्दुल गफ्फार खान जिन्हें फ्रंटियर गांधी , सीमांत गांधी और बादशाह खान जैसे नामों से भी जाना जाता था उन्होंने आजादी से पहले किया था , खुदाई खिदमतगार तंजीम ने हिन्दुस्तान की जंगे आजादी में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था । खान साहब के इंतकाल के बाद यह तंजीम एक तरह से खत्म ही हो गई थी लेकिन सन 2011 में जनाब फैसल खान साहब ने समाज के कुछ ऐसे नौजवानों और फिक्रमंद लोगों के साथ इस तंजीम का फिर से आगाज किया जिन्हें देश और समाज की कुछ फिक्र थी।

मुस्लिम युवकों को समझाते यासिर

सवाल – आपने शब-ए-बरात को ही क्यों चुना ?

जवाब -शब-ए-बारात को चुनने का कोई एक नहीं बलकि कई मकसद थे क्योंकि शब-ए-बारात एक ऐसी मुकद्दस रात है जो हजार महीनों की इबादत से अफजल है लेकिन कुछ नौजवान इस रात में इबादत ना करके इस रात को ऐसे ही बाइकों पर स्टंटबाजी करके और हुगदंड करने में गवा देते हैं,इसके अलावा दूसरे लोगों को परेशानी में डाल कर इस्लाम और मुसलमानों की इमेज खराब करते हैं तो इन्हीं सब चीज़ों को सोचकर हमने पिछले साल से एक नई शुर्ूआत की जिसमें हमारी टीम दिलली के कई जगहों पर पुलिस के सहयोग से नौजवानों को समझाकर उनसे स्टंट ना करने और मस्जिदों में जाकर इबादत करने की गुजारिश करते हैं। इस बार हमने अपनी 8 टीमें बनाई जो दिलली की मुख्तलिफ जगहों पर लोगों से गुजारिश कर के स्टंट ना करने और मस्जिदों में भेजने का काम पूरी रात करती रही।

सवाल  – क्या आपको लगता है मुस्लिम नौजवान आपका कहना मांगेगे?

जवाब -जी हां बिल्कुल हमने पिछले साल जब यह शुर्ूआत की तो हमने देखा के नौजवानों को प्यार और खुलूस के साथ समझाया गया तो उन ं नौजवानों ने बात भी मानी और वहीं पर अल्लाह से तौबा करके वापिस मस्जिदों की जानिब इबादत करने के लिए गए।

सवाल – भविष्य में आपकी तंजीम का मुस्लिम समुदाय के लिए क्या एजेंडा है ?

जवाब -यहां पर एक बात साफ कर देनी बहुत ज़रूरी है की खुदाई खिदमतगार सिर्फ मुसलमानों तक ही महदूद नहीं है। हिंदू मुस्लिम सिख इसाई हिंदुस्तान के 4 पिलर है अगर इन चारों पिलरों में सही से संबंध और एक दूसरे का सहयोग नहीं रहा तो हिंदुस्तान की जड़ें कमजोर हो सकती हैं इसीलिए खुदाई खिदमतगार खान अब्दुल गफ्फार खान की अहिंसा की विचारधारा पर चलते हुए इस मुलक के चारों पिलरो ंमें सहयोग और समन्वय स्थापित करने के लिए राम रहीम शांति सेना अभियान के तहत काम कर रही है ,जिसमे हम सांप्रदायिक रूप से अति संवेदनशील पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सभी जातियों और धर्म के लोगों के बीच आपसी भाईचारा कायम करने के का काम कर रहे हैं इसके अलावा हमारे खुदाई खिदमतगार के साथी इनामुल हसन ने पिछले 3 सालों से तमिलनाडु में शराब बंदी अभियान चला रखा है इसके नतीजे में जयललिता ने अपने चुनावी घोषणापत्र मे ंतमिलनाडु में पूर्ण शराब बंदी का वादा किया था , हम पिछले 4 सालों से हरियाणा में बेटी बचाओ अभियान चला रहे हैं इसके अलावा महिला सशक्तिकरण तथा युवाओं में सामाजिक जागरूकता पैदा करने के लिए जगह-जगह युथ लीडरशिप कैंप चला रहे हैं और भी बहुत सारे काम है जो हम समाज को बेहतर बनाने के लिए कर रहे हैं ।

तंजीम के अन्य लोग तथा साथ में प्रसाशन

सवाल – मुस्लिम समुदाय की इस समय सबसे बड़ी समस्या कौनसी है तथा उसे कैसे दूर किया जा सकता है?

जवाब – जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि हिंदू मुस्लिम सिख इसाई इस देश के चार पिलर हैं अगर इन चारों में से एक भी पिलर कमजोर हो गया तो यह देश तरक्की के रास्ते से भटक सकता है। लेकिन आज इन चारों में से मुसलमान सबसे ज्यादा कमजोर और और सबसे ज्यादा शैक्षिक,आर्थिक , राजनीतिक और सामाजिक र्ूप से पिछड़ा है इसीलिए मुसलमानों किए विकास के लिए बहुत काम करने की ज़रूरत है और इसके लिए मेरे नजरिए से मुसलमानों को खुद ही आगे आकर तालीम हासिल करनी होगी और सामाजिक रूप से जागरूक होना पड़ेगा । इसके लिए हमने अभी सर सैयद अहमद खॉ के यौम-ए-वफात के मौके पर एक यात्रा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से मुरादाबाद तक की थी । और सामाजिक रूप से जागरूक बनाने के लिए हम यूथ लीडर शिप कैंप तो चला ही रहे हैं ।

सवाल – कोहराम न्यूज़ के पाठकों से क्या कहना चाहेंगे ?

जवाब – कोहराम न्यूज़ के पाठकों से यही गुजारिश करना चाहूंगा कि इस देश और समाज को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी किसी एक इंसान की नही है ंइसके लिए हम सब को वह चाहे किसी भी मजहब जाति या धर्म से ताललुक रखने वाला इंसान हो सब को आगे आना होगा और अपने आपस के मतभेद भुलाकर सभी जाति धर्म और समुदायों से मोहब्बत और प्यार दिखाना होगा तभी हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं ।

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