Sunday, September 26, 2021

 

 

 

महिलाओं से हमदर्दी है तो दहेज़-हत्याओ को कर दो खत्म

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dowry

जैसा की आजकल ट्रिपल तलाक का मुद्दा जोर शोर से छाया हुआ है और उसमे जिस तरह महिलाओं के अधिकारों की बात की गयी है उसे देखकर लगता है की अगर देश में सबसे बड़ी समस्या है तो वो मुस्लिम महिलाओं को मिलने वाली तलाक है. इस मुद्दे में इतना वज़न है जिससे अन्य मुद्दे शायद कहीं दब से गये है. सोशल मीडिया से लेकर मेन स्ट्रीम चारो तरफ अगर कोई चर्चा है तो वो तीन तलाक से लेकर शुरू होती है और बुर्के पर खत्म.

कहने का मतलब बिलकुल सीधा सा है मामला सेंसिटिव इसीलिए है क्यों की यह एक खास धर्म से जुड़ा है अगर महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा होता तो सबसे पहले उन महिलाओं की बात की जाती तो हर घंटे दहेज़ के कारण या तो जला दी जाती है या फिर छत से धक्का दे दिया जाता है या फिर खाने में ज़हर खिला दिया जाता है.

आइये देखते है क्या कहते है आंकडें इस बारे में 

इंडियन एक्सप्रेस के 31 जुलाई के अख़बार में एक खबर प्रकाशित की गयी जिसमे उन बदकिस्मत महिलाओं की संख्या लिखी गयी जिनकी अधिक दहेज़ ना देने के कारण हत्या की गयी. ध्यान से यहाँ संख्या लिखी गयी है क्यों की मात्रा इतनी अधिक बढ़ गयी की संख्या लिखनी पड़ रही है अगर मामले गिने चुने होते तो उन महिलाओं का नाम लिखा जाता जैसा की मीडिया में आजकल तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं का नाम लिखा जा रहा है.मामला इतना भयावह है की हर घंटे एक महिला दहेज़ की सूली पर टांगी जा रही है जब तक मैं यह लेख पूरा करूँगा तब तक मरने वाली महिलाओं की संख्या में एक महिला  का और इजाफा हो जायेगा.

पिछले तीन वर्षों में 24,771 दहेज़ हत्याएं ऐसी हुई है जिनकी आधिकारिक रूप से रिपोर्ट दर्ज की गयी है जिनमे से सबसे अधिक उत्तर प्रदेश से है कुल संख 7,048.

महिला तथा बाल-विकास मंत्री मेनका गाँधी ने कहा की 2012, 2013 और 2014 में दहेज़ हत्या के मामले क्रमश: 8,233, 8,083, और 8,455  दर्ज किये गये.

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार देशभर में 3.48 लाख मामले ऐसे दर्ज किये गये जिनमे महिला के साथ या तो पति ने हिंसा की थी या पति के किसी सम्बन्धी ने, इस मामले में सबसे ऊपर पश्चिमी बंगाल है जिसमे 61,259 रिकॉर्ड किये गये फिर राजस्थान 44,311 और आंध्र प्रदेश में 34,835 का नम्बर आता है(सभी आंकड़े पिछले 3 वर्षों के है )

उत्तर प्रदेश में विगत तीन वर्षों में दहेज हत्या के 7,048 मामले दर्ज हुये। आंकड़ों पर गौर करें तो हर वर्ष 2350 दहेज के लिये हत्याएं हुई हैं। प्रतिदिन लगभग सात दहेज हत्याओं का मुकदमा दर्ज हुआ है। हालांकि कई ऐसे मामले है जिसमें पुलिस के आगे गरीब परिवार ने समझौता कर लिया है। वहीं लखनऊ जनपद का मामला देखें तो हर छठवें दिन एक विवाहिता दहेज की बेदी पर जान गंवा रही है। लखनऊ जनपद में वर्ष 2015 में 54 दहेज हत्या हुई हैं जबकि वर्ष 2014 में 50 तथा वर्ष 2013 में 60 दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ।

वहीँ अगर बात बलात्कार की हो तो भारत विश्व में चौथा ऐसा देश है जहाँ सबसे अधिक बलात्कार होते है.इससे पहले साउथ अफ्रीका , स्वीडन और यूनाइटेड स्टेट्स का नंबर है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक सन 2013 में देशभर में कुल 24,923 बलात्कार के मामले दर्ज किये गये जिनमे से 98% केस ऐसे थे जिनमे बलात्कारी को पीड़िता पहचानती थी.

अगर हमें देश में महिलाओं की स्थिति सुधारनी है तो सबसे घरेलु हिंसा को खत्म करने के लिए कोई कठोर कानून बनाना होगा, ध्यान से दहेज़ की बेदी पर झूलने वाली महिला पहले घरेलु हिंसा की शिकार होती है. जब महिला घर में सुरक्षित हो जाएगी तब उसे घर से बाहर सुरक्षित करने को लेकर ठोस कानून की ज़रूरत पड़ेगी जिससे कोई बेटी निर्भया ना बन सके.

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