Wednesday, July 28, 2021

 

 

 

चेन्नई बाढ़: मस्जिदे बनी हिंदुओं और ईसाईयों की पनाहगाह

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चेन्नई शहर के पुडुपेट इलाक़े में लोग एक मस्जिद की तारीफ़ करते नहीं थक रहे. ऐय्यास्वामी स्ट्रीट पर मस्जिद-ए-सलाम ने बारिश और बाढ़ के दौरान जिनकी मदद की, उनमें दूसरे समुदाय के लोग ज़्यादा थे. एक संकरी सी सड़क के ज़रिए जब आप मस्जिद पहुँचते हैं तो वहां सिर्फ़ राहत का सामान लदा मिलता है जिसे इलाक़े में सुबह-शाम बँटवाया जा रहा है. यहाँ के इमाम बहादुर शाह निकलकर बाहर आए और मदद की पेशकश पहले ही कर डाली.

उन्होंने बाद में बताया, “हमारा इरादा मुसलमानों और ग़ैर मुसलमानों, सभी की मदद का था. पिछले मंगलवार हमारी मस्जिद के चारों तरफ वाले इलाक़ों में सुबह की नमाज़ पढ़कर जब बाहर निकले, तो हर तरफ़ लोग चिल्ला रहे थे, मदद मांग रहे थे. इलाक़े में पानी नहीं था और यहां हिंदू, मुसलमान और ईसाई सभी हैं.” मस्जिद में रहने वाले और पड़ोसी बताते हैं कि तब मस्जिद से लोग बाहर आए और लोगों को तीन मंज़िला ऊंची मस्जिद की इमारत में ले जाने लगे.

सैयद मोहम्मद आईटी प्रोफ़ेशनल हैं. उन्होंने हमें लकड़ी के पटरे दिखाए जिन पर दो-दो बड़े ट्यूब बाँधे गए थे. इनसे पानी में फंसे लोगों को बचाकर मस्जिद तक पहुँचाया गया. मस्जिद के बगल में रहने वाले अब्दुल शकूर ने बताया, “यहां सिर्फ़ 10 प्रतिशत ही मुस्लिम हैं और हमें इस बात पर नाज़ है कि हमने 90% हिंदू-ईसाइयों की ख़िदमत की और उनकी मदद की.” चेन्नई में बारिश और फिर बाढ़ में ढाई सौ से ज़्यादा लोगों की मौत हुई, लेकिन एक दूसरे की मदद की अभूतपूर्व मिसालें भी सुनने को मिल रही हैं.

मस्जिद, चेन्नई

मस्जिद के पास रहने वाले थॉमस कहते हैं, “यह सच है कि मस्जिद की वजह से बड़ी मदद मिली. रोज़ खाने के पैकेट आ रहे हैं, चटाइयाँ बांटी जा रहीं हैं और पीने का साफ़ पानी भी मिल रहा है.” अनुमान है कि इस मस्जिद और इससे जुड़े कार्यकर्ताओं के चलते क़रीब 1,500 लोगों तक रसद पहुँच रही है और इनमें हर धर्म के लोग हैं.

मस्जिद के कर्मचारी इमादुल्लाह कहते हैं, “मस्जिद में बनने वाला खाना भी शाकाहारी है ताकि हिंदू और ईसाई भाइयों को दिक़्क़त न हो. हमें पता था कि मुसलमानों से ज़्यादा हिंदुओं को खिलाना है. सांभर-चावल, ब्रेड-दूध और लेमन राइस जैसी चीज़ें हम पहुँचा रहे हैं.”

इन दिनों मस्जिद में नमाज़ पहली मंज़िल पर पढ़ी जा रही है और ग्राउंड फ़्लोर पर सिर्फ़ राहत सामग्री ही जुटाई जा रही है. साभार: बीबीसी हिंदी

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