2नेत्रहीन नफीस को पढ़ाने को कोई मोलवी तैयार नही हुआ 


मुख़्तार असलम ने नफ़ीस को पढ़ने के लिए बनारस के जीवन-ज्योति विद्यालय भेजा जहाँ से उन्होंने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की. नफ़ीस बीएड करने के बाद बोकारो में एक हाई स्कूल में सामान्य बच्चों को हिंदी पढ़ाती हैं.बीए की पढ़ाई के दौरान नफ़ीस के मन में कुरान पढ़ने की इच्छा जगी लेकिन नेत्रहीन होने की वजह से कोई हाफ़िज़ उन्हें पढ़ाने के लिए तैयार नहीं हुआ. दिल्ली के एक संस्थान से कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा कर चुकी नफ़ीस को आख़िरकार मोहम्मद तस्लीम नाम के एक हाफ़िज़ कुरान पढ़ाने को तैयार हुए.

उनकी निगरानी में नफ़ीस ने कुरान को ब्रेल-हिंदी में लिखना शुरू किया. 2005 में शुरू हुआ काम 2008 में पूरा हुआ, जिसके बाद काफ़ी समय ग़लतियों को ठीक करने में लगा. नफ़ीस कहती हैं, “पिता की प्रेरणा, भाइयों के प्रोत्साहन और हाफिज जी की तत्परता से मुझे आज ये सौभाग्य प्राप्त हुआ है.”

किसी मज़हबी संगठन या प्रशासन से नफ़ीस को कोई प्रोत्साहन नहीं मिला, “जो लोग मुझे कुरान पढ़ाने तक को तैयार नहीं थे, मेरे पिता को गुमराह कर रहे थे, भला आप उनसे प्रोत्साहन की उम्मीद कैसे रख सकते हैं. मैं शोहरत और सम्मान की भूखी नहीं हूँ.”

नफ़ीस बताती हैं कि कुरान को प्रकाशित करने की योजना भी है. इसके लिए किसी मददगार व्यक्ति या संस्था के आगे आने का इंतज़ार है ताकि यह ज़्यादा लोगों तक पहुँच सके.