Wednesday, January 19, 2022

आखिर क्यों था Albert Einstein का दिमाग इतना खास?

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जिस इंसान ने आज तक कोई भी गलती नहीं की है उस इंसान ने आज तक कुछ भी नया करने का ट्राई ही नही किया है। ऐसा ही कुछ मानते थे दुनिया के सबसे महान साइंटिस्ट अल्बर्ट आइंस्टाइन 14 मार्च तक 1879 जर्मनी के शहर में एक यहूदी परिवार में पैदा हुए थे सर अल्बर्ट आइंस्टीन। उनके पैदा होने के बाद डॉक्टर ने नोटिस किया कि उनका सर नॉर्मल बच्चों के मुकाबले काफी बड़ा था और वह एक एब्नॉर्मल बच्चे के रूप में जन्मे थे।

इसके बावजूद भी उनका दिमाग इतना तेज था कि आज तक कोई भी उनका मुकाबला नहीं कर पाया आज 60 साल हो गए हमें छोड़ कर चले गए हैं लेकिन आज भी साइंसेस उनके बिना कमजोर है तो यही वजह है कि हर कोई उनके दिमाग के बारे में जानना चाहता है कि आखिर उनके दिमाग में ऐसा क्या था जो कि उन्हें इस मुकाम तक ले कर आया कि आज उन्हें दुनिया भर में ग्रेटेस्ट साइंटेस्ट के नाम से जाना जाता है।

क्या उनके दिमाग में कुछ सुपर नेचुरल पावर थी?

तो आइए आज आपको हमलोग अल्बर्ट आइंस्टीन के बारे में बताते है। दरअसल जब अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म हुआ था तब उनका सर किसी भी नॉर्मल बच्चे से ज्यादा बड़ा था नॉर्मल बच्चे 1-2 साल की उम्र में बात करना सीख जाते हैं लेकिन आइंस्टाइन 4 साल की उम्र तक बिल्कुल भी बात नहीं कर पाते थे।

मगर एक दिन जब वह अपने माता पिता के साथ के खाने पर बैठे थे तो अचानक अल्बर्ट आइंस्टीन बोले सूप बहुत ही गर्म है। अपने बेटे को पहली बार इस तरह सुन कर उनके पैरेंट्स एकदम हैरान हो गए और खुश भी हुए। लेकिन बाद में उनसे पूछा गया कि तुम अब तक कुछ नहीं बोलते थे तो अल्बर्ट आइंस्टीन ने अजीब जवाब दिया कि अब तक तो सब कुछ सही था।

उनके जीवन से जुड़े अजीबो गरीब किस्से यहीं नहीं रुके बल्कि उनके बड़े होने पर भी उनकी कई ऐसी आदतें थी जिनके बारे में सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है जैसे कि अल्बर्ट आइंस्टीन को डेट और फोन नंबर याद रखने में प्रॉब्लम होती थी यहां तक कि उन्हें खुद का टेलीफोन नंबर भी याद नहीं रहता था उनके एक कर्मी ने उनसे उनका फोन नंबर मांगा तो अल्बर्ट आइंस्टीन एक फोन डायरेक्टरी में अपना नंबर ढूंढने लगे।

ऐसा देखकर उनके सहकर्मी ने उनसे पूछा आप अपना खुद का फोन नंबर क्यों याद नहीं रखते? तो अल्बर्ट आइंस्टीन उनको कहा कि किसी ऐसी चीज को क्यों याद रखूं जो मुझे किताबों में ढूंढने से मिल जाती है।

अल्बर्ट आइंस्टीन हमेशा कहते थे कि मेरे अंदर कोई खास चीज नहीं है मैं भी इंसान हूं जिसमें करीओसिटी कूट-कूट कर भरी हुई है लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी की आइंस्टीन हमेशा से इतने बुद्धिमान नहीं थे बल्कि वह बचपन में पढ़ाई में बहुत ही कमजोर थे इसलिए बचपन में उनकी गिनती बेवकूफ बच्चों में की जाती थी।

उनकी कुछ हरकतों की वजह से उन्हें कुछ लोगों ने तो शारीरिक रूप से विकलांग कहना भी शुरू कर दिया था खासकर के आइंस्टीन के टीचर भी उन्हें पसंद नहीं करते थे क्योंकि वह सिर्फ साइंस और मैथ की अलावा हर सब्जेक्ट में फेल होते थे और बचपन से अल्बर्ट आइंस्टीन को किताबी ज्ञान में कोई रुचि नहीं थी हालांकि इसके बावजूद भी उन्होंने दुनिया के सामने साइंस की कई ऐसी थ्योरी पेश की जिसकी बिना आज भी साइंस कमजोर है और यही वजह है कि उनका दिमाग आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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