वैसे तो इस खबर में ज्यादा कुछ नया नही है यही बात इससे पहले सच्चर कमिटी में भी कही गयी थी की मुस्लिम समाज के पिछड़ेपन का कारन अशिक्षा है लेकिन वो रिपोर्ट आई गयी हो गयी.

ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2011 के जनगणना आंकड़ो से यह खुलासा हुआ है की देश की अगर धार्मिक लिहाज से साक्षारता की बात की जाये तो उसमे मुस्लिम समुदाय सबसे नीचे आता है लगभग 43 प्रतिशत से अधिक की मुस्लिम जनसँख्या ने कभी स्कूल का मुंह नही देखा.

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मुसलमानों के बाद दुसरे नंबर पर हिन्दू आते है जिसमे तक़रीबन 36 प्रतिशत लोग निरक्षर है.वहीँ सिख 32 फीसदी, बौध 28 फीसदी, ईसाई 25 फीसदी तक अनपढ़ है.

वैसे इस जनगणना में शून्य से 6 वर्ष के बच्चो को भी अशिक्षित ही माना गया है जिस कारण प्रतिशत मात्रा अधिक बढ़ जाती है.

अगर देश के सबसे अधिक शिक्षित समुदाय की बात की जाए तो उसमे पहला नंबर जैन समुदाय का आता है जिसमे 25 फीसदी से अधिक लोगो ने ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर रखी है. जबकि दूसरे समुदाय उससे बेहद पीछे हैं। इनमें ईसाई समुदाय में 8.85 फीसदी, सिखों में 6.40, बौद्धों में 6.18, हिंदुओं में 5.98 फीसदी और मुसलमानों में सिर्फ 2.76 फीसदी लोग ही स्नातक या इससे ऊपर की शिक्षा हासिल कर पाए हैं। मुसलमानों में केवल 0.44 फीसदी लोगों ने तकनीकी -गैर तकनीकी डिप्लोमा डिग्री हासिल कर रखी है। 4.44 फीसदी 12वीं तक पढ़े हैं। 6.33 फीसदी ने दसवीं तक शिक्षा हासिल की है। 16.08 फीसदी मुसलमान प्राइमरी स्तर तक पढ़े हैं।

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