Saturday, October 23, 2021

 

 

 

10 राज्यों में गो-हत्या पर नहीं है प्रतिबंध

- Advertisement -
- Advertisement -

नई दिल्ली।

भारत के 29 में से 10 राज्य ऐसे हैं जहां गाय, बछड़ा, बैल, सांड और भैंस को काटने और उनका गोश्त खाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। बाकि 18 राज्यों में गो-हत्या पर पूरी या आंशिक रोक है।
भारत की 80 प्रतिशत से ज्यादा आबादी हिंदू है जिनमें ज्यादातर लोग गाय को पूजते हैं। लेकिन ये भी सच है कि दुनियाभर में ‘बीफ’ का सबसे ज्यादा निर्यात करनेवाले देशों में से एक भारत है।
दरअसल ‘बीफ’, बकरे, मुर्ग़े और मछली के गोश्त से सस्ता होता है। इसी वजह से ये गरीब तबकों में रोज के भोजन का हिस्सा है, खास तौर पर कई मुस्लिम, ईसाई, दलित और आदिवासी जनजातियों के बीच।
इसी महीने हरियाणा और महाराष्ट्र के गो-हत्या विरोधी कानून कड़े करने पर ‘बीफ’ पर बहस फिर गरमा गई। यहां तक की भारत में ह्यबैनह्ण की संस्कृति पर कई पैरोडी गाने भी बनाए गए।
इसीलिए बीबीसी हिन्दी ‘बीफ’ की खरीद-फरोख़्त के अर्थव्यवस्था पर असर, उसके स्वास्थ्य से जुड़े फायदे, गो-हत्या पर रोक की मांग करनेवालों की राय, रोक पर राजनीति और उसके इतिहास पर विशेष रिपोर्ट्स लेकर आ रहा है।
गो-हत्या पर कोई केंद्रीय कानून नहीं है पर अलग राज्यों में अलग-अलग स्तर की रोक दशकों से लागू है। तो सबसे पहले ये जान लें कि देश के किन हिस्सों में ‘बीफ’ परोसा जा सकता है।

पूरा प्रतिबंध
गो-हत्या पर पूरे प्रतिबंध के मायने हैं कि गाय, बछड़ा, बैल और सांड की हत्या पर रोक।
ये रोक 11 राज्यों झ्र भारत प्रशासित कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महराष्ट्र, छत्तीसगढ़, और दो केन्द्र प्रशासित राज्यों – दिल्ली, चंडीगढ़ में लागू है।
गो-हत्या कानून के उल्लंघन पर सबसे कड़ी सजा भी इन्हीं राज्यों में तय की गई है। हरियाणा में सबसे ज्यादा एक लाख रुपए का जुमार्ना और 10 साल की जेल की सजा का प्रावधान है।
वहीं महाराष्ट्र में गो-हत्या पर 10,000 रुपए का जुमार्ना और पांच साल की जेल की सजा है।
हालांकि छत्तीसगढ़ के अलावा इन सभी राज्यों में भैंस के काटे जाने पर कोई रोक नहीं है।

आंशिक प्रतिबंध
गो-हत्या पर पूरे प्रतिबंध के मायने हैं कि गाय और बछड़े की हत्या पर पूरा प्रतिबंध लेकिन बैल, सांड और भैंस को काटने और खाने की इजाजत है।
इसके लिए जरूरी है कि पशू को फिट फॉर स्लॉटर सर्टिफिकेट मिला हो। सर्टिफिकेट पशु की उम्र, काम करने की क्षमता और बच्चे पैदा करने की क्षमता देखकर दिया जाता है।
इन सभी राज्यों में सजा और जुमार्ने पर रुख भी कुछ नरम है। जेल की सजा छह महीने से दो साल के बीच है जबकि जुमार्ने की अधितकम रकम सिर्फ़ 1,000 रुपए है।
आंशिक प्रतिबंध आठ राज्यों, बिहार, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, गोवा और चार केंद्र शासित राज्यों झ्र दमन और दीव, दादर और नागर हवेली, पांडिचेरी, अंडमान ओर निकोबार द्वीप समूह में लागू है।

कोई प्रतिबंध नहीं
दस राज्यों – केरल, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम और एक केंद्र शासित राज्य लक्षद्वीप में गो-हत्या पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
यहां गाय, बछड़ा, बैल, सांड और भैंस का मांस खुले तौर पर बाजार में बिकता है और खाया जाता है।
आठ राज्यों और लक्षद्वीप में तो गो-हत्या पर किसी तरह को कोई कानून ही नहीं है। असम और पश्चिम बंगाल में जो कानून है उसके तहत उन्हीं पशुओं को काटा जा सकता है जिन्हें फिट फॉर स्लॉटर सर्टिफिकेट मिला हो।
ये उन्हीं पशुओं को दिया जा सकता है जिनकी उम्र 14 साल से ज्यादा हो, या जो प्रजनन या काम करने के काबिल ना रहे हों।
वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक इनमें से कई राज्यों में आदिवासी जनजातियों की तादाद 80 प्रतिशत से भी ज्यादा है। इनमें से कई प्रदेशों में ईसाई धर्म मानने वालों की संख्या भी अधिक है।

दिव्या आर्य की स्पेशल रिपोर्ट

खबर बीबीसी हिन्दी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles