Tuesday, October 19, 2021

 

 

 

मो. आमिर के लिए दिल्ली सरकार को नोटिस

- Advertisement -
- Advertisement -

By TwoCircles.net Staff Reporter

दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी करके पूछा है कि आतंकवाद के आरोपों से बरी हुए मो. आमिर को मुवाअज़ा क्यों न दिया जाए?

पुरानी दिल्ली के मो. आमिर को 27 फ़रवरी 1998 को गिरफ़्तार किया गया था और आतंकवाद के आरोप लगाकर उन्हें जेल में डाल दिया गया था. आमिर ग़िरफ़्तारी के वक़्त 18 साल के थे और 14 साल बाद जब वो जेल से रिहा हुए तो उनकी लगभग आधी उम्र बीत चुकी है. दिल्ली हाईकोर्ट समेत कई अदालतों ने उन्हें आतंकवाद के आरोपों से बरी किया है और इस समय मो. आमिर आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में एक जुझारू मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं.

गिरफ़्तारी के बाद आमिर देश की विभिन्न जेलों में रहे. आमिर को ज़्यादातर वक़्त दिल्ली के तिहाड़ जेल में हाई सिक्योरिटी सेल में रखा गया. उन्हें पता ही नहीं था कि इस दौरान उनके पिता की मौत हो गई, आमिर की मां को ब्रेन स्ट्रोक के बाद लकवा मार गया, जिसके बाद उन्होंने बोलने की शक्ति खो दी और पिछले दिनों वो भी चल बसीं. करियर को लेकर आमिर के जो ख्वाब थे, उनके पूरा होने का कोई सवाल ही नहीं.

दिल्ली सरकार को जारी नोटिस में अपने एक टिप्पणी में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करे. ऐसे में जब आमिर की पूरी ज़िन्दगी जेल जाने की वजह से पटरी से उतर गई हो, सरकार को उनके मदद के लिए आगे ज़रूर आना चाहिए.

नोटिस में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि बेगुनाह आमिर को गलत तरीक़े से गिरफ्तार करके 14 साल जेल में रखने के एवज़ में 5 लाख का मुआवज़ा क्यों न दिया जाए. दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव के पास इस नोटिस का जवाब देने के लिए 6 हफ्ते हैं.

आमिर के इस मामले को आम आदमी पार्टी से जुड़े ओखला के विधायक मो. अमानतुल्लाह खान ने विधानसभा में भी उठाया था और दिल्ली सरकार से मुवाअज़ा के साथ-साथ सरकारी नौकरी देने की भी मांग की थी.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा भेजे गए नोटिस पर TwoCircles.net से बातचीत करते हुए अमानतुल्लाह खान कहते हैं, ‘जिस आमिर की पूरी ज़िन्दगी दिल्ली पुलिस ने ख़त्म कर दी हो. जिसका पूरा घर बर्बाद हो गया हो, क्या उसकी भरपाई 5 लाख के मुआवज़े से हो सकती है?’

अमान्तुल्लाह आगे कहते हैं, ‘दिल्ली सरकार को मुवाअजे के साथ-साथ सरकारी नौकरी भी देनी चाहिए. मैं इस मामले में आमिर के साथ हूं और हक़ के लिए लड़ता रहूंगा.’

वहीं TwoCircles.net से बातचीत में मो. आमिर कहते हैं, ‘अपने पिता के साथ-साथ मैंने ज़िन्दगी के जो 14 साल खोए हैं, उसे कोई पैसा वापस नहीं दिला सकता है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जिस रक़म की बात की है, वो काफी कम है. ग़नीमत है कि कम से कम उन्होंने दिल्ली सरकार को नोटिस भेजकर याद तो दिलाया.’

आमिर फिलहाल बेरोज़गार है और अब खुद के रोज़गार से अपनी बेपटरी ज़िन्दगी को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश में जुटे हुए हैं. वह कहते हैं, ‘मुझे पूरी उम्मीद है कि आम आदमी पार्टी की सरकार मुझ जैसे लोगों के लिए सकारात्मक क़दम उठाएगी. सिर्फ़ मुवाअज़ा ही नहीं, बल्कि रोज़गार के कुछ अवसर भी उपलब्ध कराएगी.’

स्पष्ट रहे कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मार्च 2014 के मीडिया रिपोर्टों के आधार पर आमिर के मामले का स्वतः संज्ञान लिया था. हालांकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इससे पूर्व भी मार्च 2014 में ही केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजकर चार हफ्तों में जवाब मांगा था.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles