कोहराम न्यूज़ नेटवर्क – दादरी के अखलाक के बाद देश को हिला देने वाली एक और घटना घटी है झारखंड के लातेहार में दो मुस्लिम युवकों को मारकर उन्हें पेड़ से लटका दिया गया, जहाँ एक तरफ दादरी बीफ हत्याकांड ने पूरी दुनिया में भारत की किरकिरी करवाई थी उसी तरह ये हत्याकांड भी देखते देखते मुद्दा बनता जा रहा है, इस हत्याकांड का आरोप स्थानीय भगवाधारियों पर लगाया गया है तथा मामले की नजाकत को देखते है क्षेत्र में धारा 144 लगा दी गयी है|

आइये देखते है इस दोहरे हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया पर क्या चर्चाएँ की जा रही है

“दादरी में शुरू हुई हत्यायें लातेहार में बच्चों को पेड़ पर टाँग देने तक आ पहुँची हैं. कुछ ‘निष्पक्ष’ बुद्धिजीवी इनको फ्रिंज- बोले तो अतिवादी हिस्से की हरकतें बताने तक. समझ रहे हैं न? विकास से लेकर ऐसे निष्पक्ष बुद्धिजीवियों तक की हकीकत? ” – Samar Anarya

रघुवर दास जी आपके राज में मुसलमान व्यापारियों को मार कर पेड़ पर लटका दिया जा रहा है और हत्यारों का सुराग लगा पाने में आपकी पुलिस के पसीने छूट रहे हैं. लातेहार में यह पहली घटना नहीं है,इसके पहले भी एक मुसलमान व्यापारी को अगवा कर लिया गया था. – Mohammad Anas

झारखंड से सामने आई दादरी जैसी खबर ने एकबार फिर सभी को हैरान कर दिया है। रांची से लगभग 100 किमी दूर लातेहार जिले के बालूमाथ के जंगलों में 8 भैंसों को बाजार ले जा रहे दो युवकों को पशु संरक्षण समिति के लोगों ने पीटा और फिर पेड़ से लटकाकर उन्हें फांसी दे दी। अल्पसंख्यक समुदाय के दोनों युवकों को पीटने से पहले उनके हाथ पीछे से बांध दिए गए थे और मुंह में कपड़ा ठूंस दिया गया था। मृतकों की पहचान हेरगंज थाना क्षेत्र नवादा गांव निवासी मजलूम अंसारी (35) और आजाद खान उर्फ इब्राहिम (15) के रूप में हुई है। ऐसी खबरें आई हैं जिसमें दावा कर इस हत्या के पीछे हिंदू कट्टरवादी ताकतों का हाथ बताया गया है। ‪#‎भारत_भगवानिस्तान_बन_गया_है‬Wasim Akram Tyagi

“जब ‘हत्या’ दादरी में होती है, तो लगता है, ‘दादरी’ में हुआ, उत्तरप्रदेश में हुआ. हमारे शहर इन क्रूर मानसिकताओं की ज़द से बाहर होंगे. पर जब यह बालूमाथ, लातेहार में होता है, तब हम चौंकते हैं, लगता है, हम अपने शहरों को कितना कम जान रहे थे. तब लगता है, शहर में जिनके होने न होने को हम नज़रअंदाज़ कर चल रहे थे, गलत थे. गौ-रक्षा समिति, बजरंग दल छाप कुछ संगठनों के महज़ 15 से 25 लोग ही छोटे शहरों के माहौल में ज़हर घोल देने के काफी होते हैं” – Mithilesh Priyadarshy

“झारखंड के लातेहार ज़िले के झाबर गांव के दो मुस्लिम मजलूम अंसारी और 14 वर्षीय इम्तेयाज खान के आये “अच्छे दिन” – Mashruf Kamaal

“भाजपा शासित राज्य झारखंड के लातेहार में भैस व्यापारी (जिसमें एक नाबालिग लड़का भी है) को बड़ी बेरहमी से हत्या कर के पेड़ से लटका दिया गया । कहाँ मर गया कानून व्यवस्था। क्यों दलाल मिडिया चुप हैं ? क्या भारतीय का खून इतना सस्ता है? क्या झारखंड में इसलिए RSS की सरकार बनी जो गरीबी कम करने की जगह गरीबों को कम करने में लगी है?” – Mumtaz Alam

एक अख़लाक़ पर खूब शोर मचा ! लेकिन आज झारखंड के लातेहार में दो और अख्लाक की शहादत पर सब खामोश हैं, क्योंकि हम खुद शोर कब मचाते हैं, आदत ही नहीं रही। शोर मचाने के लिए भी हम किसी इशारे का इंतज़ार करते हैं । या फिर मीडिया में खबर बनने का ? आज हम रंजीदा क्यों नहीं ? गुस्से की तो बात ही छोङिए ? हक़ीकत तो ये है की हम उनकी मौत से भी अब तक बेखबर हैं ? तभी तो मैं कहता हूँ कौम की याददाश्त बहुत कमज़ोर है ! लातेहार में दो पशु व्यापारियों की हत्या कर उनके शव पेड़ से लटका दिए गए…इनमें से एक का नाम मजलूम अंसारी और दूसरे का नाम इम्तियाज ख़ान है। इसके बाद से ईलाके में तनाव है और हिंसक झङपें भी हुई हैं। अब खबर मिल रही है की पुलिस ने हत्या के पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है । अख़लाक़ की मौत सियासत और सियासी रहनुमाओं के लिए नफा नुकसान का सौदा था लेकिन क्या आपके लिए भी ऐसा ही था ! अगर नहीं तो मज़लूम अंसारी और इम्तियाज़ खान की मौत का मातम कहाँ है ? –Shams Tabrej

स्थानीय लोगो के अनुसार इन दोनों पर इसलिए हमला हुआ क्योकि यह दोनों पशुपालन व्यवसाय से सम्बन्ध रखते थे। लातेहार के विधायक राम प्रकाश ने कहा ” 4 महीने पहले भी इसी तरह की एक वारदात बालामूथ के गोमिया गाँव में एक पशुपालक के साथ हुई परंतु वह बचने में सफल रहा था। – Abdul H Khan

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