गोरखपुर- बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई सामूहिक मौतों के बाद जिस तरह देश का लगभग हर शख्स दुखी है वहीँ डॉ. कफील अहमद जैसे लोगो का चेहरा भी सामने आया जिन्होंने दुनिया को इंसानियत का मतलब बताया. उनकी वजह से कई मरीजों की जान बच पाई.

कौन है कफील खान ?

डॉ कफ़ील अहमद गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इंसेपेलाइटिस वार्ड के प्रभारी व बाल रोग विशेषज्ञ है. जिन्हें हाल ही में पद से हटाया गया है. दरअसल जिस रात को एक के बाद एक बच्चें ऑक्सिजन न होने की वजह से दम तोड़ रहे थे. उसी दौरान डॉ कफ़ील गोरखपुर की सड़कों पर ख़ाक छानते हुए आधी रात को अपने पैसों से ऑक्सिजन के सिलेंडर का इंतजाम कर रहे थे. ये डॉ कफ़ील की मेहनत है कि मरने वालों का आकड़ा 70 के पार नहीं पहुंचा अन्यथा हालात और भयावह हो सकते थे.

फर्ज निभाने की मिली सज़ा

दुनिया को इंसानियत का मतलब समझाने वाले डॉ कफ़ील खान को सीएम योगी के अस्पताल के दौरे के बाद ही अपना फर्ज निभाने की सज़ा मिल गई. उन्हें पद से हटा दिया गया. उनकी जगह डॉक्टर भूपेंद्र शर्मा को नियुक्त किया गया. हालांकि उनको हटाए जाने का बड़े पैमाने पर विरोध हुआ. उनके समर्थन में बॉलीवुड की हस्तियाँ भी खड़ी नजर आई. फ़िल्मकार अनुराग कश्यप  ने कफील को पदमुक्त करने पर उन्होंने योगी सरकार के बेनकाब होने और खुद की गंदगी दूसरो पर फेंकने का आरोप लगाया है.

लगे झूठे इलजाम

पद मुक्त की कार्रवाई के बाद उन पर अस्पताल से सिलिंडर चोरी करने का आरोप लगाया गया. हालांकि पड़ताल में ये आरोप झूठा साबित हुआ. गोरखपुर के मशुहुर पत्रकार मनोज सिंह ने अपनी रिपोर्ट में बताया, अस्पताल के एंसिफ़लाइटिस वार्ड में जहाँ मौतें हुईं मरीज़ों को सीधे सिलिंडर से नहीं बल्कि पाइप के ज़रिए हर बिस्तर पर ऑक्सीजन पहुँचाई जाती है. मनोज ने बताया कि पहले ज़रूर ऑक्सीजन के सिलिंडर काम में लाए जाते थे लेकिन 2014 में अस्पताल ने ये नया सिस्टम लगाया.

उन्होंने डॉ. अज़ीज़ अहमद के हवाले से लिखा कि उन पाइपों में ऑक्सीजन डालने के लिए ज़रूर सिलिंडर लगाए जाते हैं लेकिन वो बहुत बड़े सिलिंडर होते हैं और एक-एक को उठाने के लिए तीन से चार आदमियों की ज़रूरत पड़ती है. फिर, वो सिलिंडर अलग कमरे में लगाए जाते हैं और उनके रखरखाव वाले विभाग से डॉ. कफ़ील अहमद का कोई लेनादेना नहीं है. उन बड़े सिलिंडरों का अस्पताल में पूरा लेखाजोखा होता है.

दूसरा आरोप उन पर सरकारी डॉक्टर होने के बावजूद ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से प्राइवेट प्रैक्टिस का लगा. इस बारें में मनोज ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि डॉ. कफ़ील अहमद अस्थायी नौकर हैं, जिसे ad hoc appointee कहा जाता है, और ऐसे डॉक्टरों पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने की पाबंदी नहीं है क्योंकि वो अस्थायी हैं और कभी भी निकाले जा सकते हैं.

तीसरा गंभीर आरोप उन पर बलात्कार का लगाया गया, हालांकि ये भी झूठा साबित हुआ. आरोप के मुताबिक़ अप्रैल 2015 एक युवती सुफिया ने डॉ. कफील अहमद पर छेड़छाड़ और रेप का आरोप लगाया था जिसे लेकर थाना कोतवाली गोरखपुर में तहरीर दी गयी थी, जिसके बाद पुलिस ने तमाम आरोपों की गहनता से जांच की. जिसके बाद पुलिस ने एक रिपोर्ट तैयार की और तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक धरचार्य पाण्डेय – कैंट थाना गोरखपुर को प्रेषित कर दी. इस रिपोर्ट में  पुलिस ने युवती की तहरीर पर की जाने वाली जांच की बात कही है.

पुलिस की इस रिपोर्ट के मुताबिक आवेदिका सुफिया पत्नी मुबारक जो की गोरखपुर के पुर्दिलपुर की निवासी है उन्होंने डॉक्टर कफील अहमद पर आरोप लगाया था की उन्होंने (डॉ.कफील ने) युवती के साथ रेप तथा छेड़खानी की है लेकिन पुलिस ने जांच करने के बाद इस आरोप को गलत पाया. पुलिस के अनुसार आवेदिका सुफिया द्वारा डॉ.कफील पर लगाये आरोप असत्य तथा निराधार पाए गये तथा जांच में युवती के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ एवम रेप की पुष्टि नही हुई. घटना पूरी तरह झूठी तथा निराधार है.

मुस्लिम परिवार शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें

Loading...

विदेशों में धूम मचा रहा यह एंड्राइड गेम क्या आपने इनस्टॉल किया ?