Friday, January 28, 2022

महिलाओं को ‘सेक्स प्रोडक्ट’ बताने वाले इन विज्ञापनों को देखकर क्यों नही जागता नारीवादियों का फेमिनिस्म

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व्यंग –

नारीवादी महिलाओ की सबसे बड़ी उलझन अगर कोई है तो वो है पुरुषवादी समाज साब आप कुछ कहकर तो दिखाओ महिलाओं को लेकर ऐसे पीछे पड़ेंगी की डिटोल हैण्डवाश बनाने बनाने वाले भी शर्मा जाएँ. पिछले दिनों सल्लू मियां का केस तो याद ही होगा.. ?

जब नारियों पर अत्याचार की बात आती है तो उनका सारा ब्लेम बेचारे पुरुषो पर डाल दिया जाता है लेकिन जब भी कहीं किसी महिला पर अत्याचार होता है, कहीं दहेज़ के लिए जलाया जाता है कहीं जिस्म फरोशी के लिए मजबूर किया जाता है तो उसमे किसी दूसरी महिला का रोल ज़रूर निकलता है. खैर यह तो रही उपदेश देने वाली बात चलो अपन लोग टॉपिक पर आते है

यह विडियो लगाया गया है नीचे जिसका काम दांतों को चमकाना है मज़बूत चमकते दांत बनाने का दावा किया जाता है लेकिन .. मामला तो लीक से हट गया यह प्रोडक्ट दांत चमकाए या ना चमकाए लड़की ज़रूर पटवा देगा और वो भी ऐसी वैसी नही बेहतरीन मॉडलनुमा हाई फाई लड़की जो आपके साथ आपके घर तक चली जाएगी.

चलिए पहले तो इस advertisement का पोस्ट मार्टम करते है

विज्ञापन में इस्तेमाल किये शब्दों पर ज़रा तवज्जो फरमाएं 

फर्स्ट लुक के बाद सब कुछ डिपेंड करता है आपके फर्स्ट मूव पर, आप बन सकते हो वो guy जिसके साथ वो शौपिंग जाए, clubbing जाये और घर जाएँ (ऊहू ऊहू) और आप क्लोज करो और बनाओ फर्स्ट मूव जिसके साथ वो शौपिंग जाए, clubbing जाये और घर जाएँ.

अब भाई इसमें दांत चमकाने है या दांतों की मजबूती का ज़िक्र तो कहीं है ही नही ? और साफ़ साफ़ बताया जा रहा है की लड़की कॉलेज इसीलिए जाती है की कोई उसे वहां प्रोपोज करे. इसके बाद सीधा टारगेट उन लोगो पर जिन्हें छल्ला बनाकर गुल्ला मारना है. भाई आप कॉलेज जाते हो और कोई मस्त लड़की नही पटी ..? अमा क्या ख़ाक कॉलेज गये ? अपने जूनियर को क्या सीखोगे, दोस्त क्या बोलेंगे .. मेट्रो में अकेले घूमोगे ..? तो ले आओ हमारा प्रोडक्ट और पटाओ मस्त लड़की (जैसी विज्ञापन में दिखाई गयी है) अब पुरानी पिक्चरें तो मुहब्बत का इज़हार और शादी करके खत्म हो जाती थी .. भाई तू उससे आगे बढ़ .. देख सुन लड़की मतलब मौज मस्ती वाला आइटम .. उसे शौपिंग करा खुश रहेगी .. क्लब ले जा खुश रहेगी .. इसके बाद तो आराम से तेरे घर चली जाएगी … ( दो गुलाब एक दुसरे से टकराते है पर्दा गिरता है और दर्शक खड़े होकर तालियाँ बजाते है )

अब जहाँ सीधे सीधे महिला को एक सेक्स प्रोडक्ट के तौर पर दिखाया जा रहा है उस समय नारीवादियों का समाज पूरी तरह चुप है. उपर से तीसरे नंबर वाला advertisement देखिये जिसमे ऐसा दिखाया गया है की महिलाओं को सेक्स के अलावा कोई दूसरा काम है नही कुछ भी कैसे भी मर्द को रिझाना है ..

चौथे वाला विज्ञापन तो सबका बाप है इसमें तो लड़के से टकराते ही लड़की अपनी ज़मीन की जगह बिस्तर पर गिरती है और अपना काम अंजाम देने के बाद आगे निकल जाती है. लड़के ने मस्त वाला डियो लगाया होता है.

कल्पना चावला, मायावती, सुषमा स्वराज, इंदिरा गाँधी, ममता बनर्जी, वो महिलाएं है जिनपर देश गर्व करता है ना की सेक्स डॉल बनाकर दिखाए जाने वाले इन विज्ञापनी लड़कियों पर.

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