मुस्लिमों की 13 पॉइंट रोस्टर पर क्रांति, क्या दलित आर्टिकल-341 के खिलाफ उतरेंगे सड़कों पर?

11:45 am Published by:-Hindi News

पिछले सत्तर सालों से आर्टिकल 341 के ज़रिए मुसलमानों को दलित आरक्षण से वंचित रखा गया है। शैक्षणिक, सरकारी नौकरियों से लेकर विधायिका तक से दूर रखा गया। ये आर्टिकल संविधान की मूलआत्मा जिसमें ‘समानता के अधिकार का ज़िक्र है’ उसके खिलाफ है। कई मुस्लिम संगठन बरसों से इसपर लगातार संघर्ष करते रहे हैं। पर आजतक कोई भी पिछड़ा एवं दलित हिंदू समाज का बुद्धिजीवी या संगठन आर्टिकल 341 को लेकर मुसलमानों के पक्ष में खड़ा नहीं हुआ। पिछड़ा एवं दलित समाज से क्या गिला शिकवा करें, मुसलमानों का खुद एक बहुत बड़ा तबका इसके खिलाफ निकल जाएगा।

पर आज मेरा सवाल है उन मुसलमानों से, जो 13 पोईंट रोस्टर पे आज क्रांति कर रहे हैं। क्या उनके अंदर इतनी हिम्मत है कि कभी उन पिछड़े एवं दलित संगठनों से सवाल खड़ा कर पाएँगे कि मुसलमानों के दलित आरक्षण पर उनकी क्या राय है? क्या वो मुसलमान जो आज सड़क पे थे वे कभी आर्टिकल 341 खत्म करने को लेकर कभी सड़क पे उतर पाएँगे?

जो मुसलमान आज 13 पोईंट रोस्टर पे सड़क पे हैं, उनमें से आप पता करोगे तो पाओगे अधिकतर तो खुद मुस्लिम समाज के दलितों के आरक्षण के खिलाफ निकल जाएँगे।

reservation muslim

13 पोईंट रोस्टर वाक़ई एक संवेदनशील मसला है, ये हर हाल में खत्म होना चाहिए। पर इससे भी अधिक खतरनाक आर्टिकल 341 है। एक पूरी क़ौम को इसके ज़रिए साइड में लगा दिया गया है, जिसपर कोई ज़िक्र करने को तैयार नहीं है।

एक तरफ हिंदू धोबी आरक्षण पाता है तो दूसरी तरफ मुसलमान धोबी दर दर भटकता है। मुसलमान धोबी इसलिए दर दर भटकता है क्योंकि इसके समाज के ठेकेदारों ने इसको अपना मानने से इंकार कर दिया है।

एक बहुत बड़ा तबका है जो दलित मुसलमानों के आरक्षण के मुद्दे पर ये कहकर आगे निकल जाता है कि इस्लाम मसावात का दर्स देता है (मतलब इस्लाम में सब बराबर हैं। जोकि पूरी तरह से सत्य है, पर भारतीय मुसलमानों में जातिवाद भरा हुआ है इसपर इंकार नहीं किया जा सकता) लेकिन अगर आप देखोगे तो पाओगे कि यही तबक़ा 13 पोईंट रोस्टर के विरोध में दिखेगा। अब भाई 200 पोईंट रोस्टर भी कौनसा मसावात का दर्स देता है जिसके लिए आप क्रांति कर रहे हो?

सोचने की बात है कि जो मुसलमान अपने समाज के हित में खड़ा नहीं हो सकता वो अगर 13 पोईंट रोस्टर के विरोध में खड़ा है तो वो मात्र दिखावा कर रहा है। ऐसे लोगों से बचें।

प्रोफेसर मजीद मजाज की कलम से…

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