क्या आप मार्क जुकरबर्ग को जानते हैं? इस सवाल पर किसी-किसी का जवाब ना में और ज्यादातर का जवाब हां में होगा। दुनिया का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, वह मार्क के जिक्र बिना अधूरा रहेगा।

एक ऐसा दूरदर्शी नौजवान जिसने दुनिया को दिखा दिया कि जब लोग तकनीक के जरिए एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं तो उनकी ताकत कई गुना बढ़ जाती है। फेसबुक की वजह से कई देशों में क्रांतियां तक हो गईं, बेरहम तानाशाहों को गद्दी छोड़नी पड़ी। कई बार ऐसा भी हुआ कि जब जमाने को किसी की आवाज सुनने की फुर्सत नहीं थी, तो फेसबुक उनकी ताकत बन गया।

… लेकिन बात सिर्फ यहीं तक नहीं है। आज सुबह जब मैं फेसबुक पर आपकी प्रतिक्रियाएं पढ़ रहा था तो वहां मुझे मार्क जुकरबर्ग के नाम एक संदेश मिला। यह एक फेसबुक पोस्ट की शक्ल में था। संदेश यह था कि फेसबुक कहीं न कहीं आने वाली पीढ़ी के भविष्य को अंधकारमय बना देगा।

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

बहुत दिलचस्प शिकायत थी और यह मेरे जैसे किसी देहाती छोकरे ने नहीं, अत्यंत उच्च शिक्षित मनुष्य ने की थी। इसके बाद मैंने फेसबुक के प्रभावों का पता लगाने के लिए कई वेबसाइट्स का अध्ययन किया और पाया कि यह शिकायत काफी हद तक सही है।

मालूम हुआ कि फेसबुक के कारण एक व्यक्ति की बीवी इतनी नाराज हुई कि उसने सामान उठाया और मायके चली गई। वहीं दूसरी ओर कई दिनों से खोया हुआ बच्चा फेसबुक पर शुरू हुई एक मुहिम की वजह से वापस मिल गया। दोनों ही तरह के असर हैं।

आज मैं आपको मेरी जिंदगी से जुड़ी एक दिलचस्प घटना बताऊंगा और उसके लिए मैं फेसबुक तथा मार्क जुकरबर्ग का दिल से आभारी हूं। करीब एक साल पहले मैं फेसबुक पर सक्रिय हुआ था। तब मैंने खुद से दो वायदे किए। पहला, किसी भी राजनेता का न तो अंधभक्त बनूंगा और न अंधविरोधी। दूसरा, सिर्फ वही चीजें लिखूंगा जिनका समाज पर सकारात्मक प्रभाव हो। सांप्रदायिक, भड़काऊ और महिला विरोधी पोस्ट नहीं करूंगा। तीसरा वायदा करने की कभी जरूरत ही नहीं हुई।

मैंने शुरुआत कुरआन की शिक्षाओं और हजरत मुहम्मद (सल्ल.) के जीवन पर लेखन से की। इसकी एक वजह तो ये थी कि हजरत मुहम्मद (सल्ल.) का मैं दिल से बहुत सम्मान करता हूं, दूसरी यह कि हमारे देश में (खासकर हिंदू समाज में) मुहम्मद (सल्ल.) को लेकर भयंकर गलतफहमियां हैं। इन्हीं गलतफहमियों का फायदा कुछ राजनीतिक दल और कट्टरपंथी संगठन उठाते हैं क्योंकि उन्हें वोट चाहिए, भले ही किसी की भी लाश के बदले मिल जाएं।

एक दिन मेरे पास किसी मुस्लिम पाठक का मैसेज आया। उन्होंने कहा- राजीव भाई, मेरे पड़ोस में कोई पंडितजी रहते हैं। कुछ दिन पहले मेरा उनसे झगड़ा हो गया। झगड़े की वजह यह थी कि मेरा बेटा जब कचरा फेंकने गया तो उसने पंडितजी के घर के पास फेंक दिया। उसमें अंडे के छिलके थे। रात को गोश्त बनाया था, उसके भी कुछ टुकड़े रहे होंगे।

जब पंडितजी को मालूम हुआ तो वे बहुत नाराज हुए। हमारा खूब झगड़ा हुआ। इस घटना के बाद मेरी उनसे बोलचाल बंद हो गई। एक रोज मैंने आपके फेसबुक पेज पर हजरत मुहम्मद (सल्ल.) के जीवन का एक अध्याय पढ़ा। उसमें बताया गया था कि नबी (सल्ल.) के कुछ पड़ोसी बहुत शरारती थे। जब आपके (सल्ल.) घर में खाना पक रहा होता तो वे परेशान करने के इरादे से आते और चुपके से चूल्हे पर कचरा या कोई गंदी चीज डाल जाते। फिर खूब हंसते।

पर इन सबके बावजूद नबी (सल्ल.) उन्हें माफ कर देते और पूछते- यह कैसा सलूक? उन जालिमों को हर शरारत के बदले माफी ही मिलती रही लेकिन कालांतर में जब बद्र का युद्ध हुआ तो ऐसे कई दुष्ट मारे गए।

मैंने नबी (सल्ल.) से सीखा कि पड़ोसी को कैसा होना चाहिए। मैंने उन बुरे पड़ोसियों से भी सीखा कि पड़ोसी को कैसा नहीं होना चाहिए। दूसरे ही दिन मैं हिम्मत कर पंडितजी के घर गया। मुझे देखकर वे खुश हुए। चाय पिलाई और बातचीत करने लगे। मैंने उस दिन की घटना के लिए माफी मांगी।

पंडितजी ने मेरे हाथ थामते हुए कहा- कोई बात नहीं। तुम्हारे बेटे से गलती हुई, मेरे बेटे से भी गलती हो सकती थी। उस दिन के लिए मैं भी उतना ही कसूरवार हूं, जितना कि तुम। मुझे तुरंत गुस्सा नहीं होना चाहिए था। शांति से अपनी बात कहता तो ऐसी नौबत ही न आती।

वापसी के वक्त हमने हाथ मिलाया और गले भी मिले। हम दोनों के दिलों का बोझ हल्का हो गया। मैं आपका आभारी हूं कि फेसबुक के जरिए नबी (सल्ल.) के महान जीवन की वह घटना मुझे बताई और हम दोनों परिवार आज बहुत खुश हैं।

यह संदेश पढ़कर मुझे इतनी खुशी हुई कि मैं बता नहीं सकता। मैंने महसूस किया कि मेरी मेहनत वास्तव में कामयाब हो गई। मैं तो खुदा का इस बात को लेकर शुक्रगुजार हूं कि कचरा फेंकने वाली उस घटना के बारे में राजनेताओं को खबर नहीं हुई। वर्ना लाश पंडितजी की गिर सकती थी और उनके पड़ोसी की भी। हां, नेताओं की चांदी हो जाती, वे जमकर वोट लेते।

मैं उसका भी शुक्रगुजार हूं जिसने आज जुकरबर्ग के नाम पैगाम दिया, वर्ना मैं आपको यह घटना बता ही नहीं पाता।

आप सभी साथियों से मेरा निवेदन है कि फेसबुक को अपनी कमजोरी नहीं, ताकत बनाइए। यह एक बहुत ताकतवर आग है जिससे चाहें तो लाखों-करोड़ों जिंदगियों को रोशन किया जा सकता है। इसका सही इस्तेमाल कीजिए। इस मंच पर अच्छाई फैलाइए, बुराई नहीं। यह भी याद रखिए कि फेसबुक पर गलत बातें लिखने से क्रांति नहीं आएगी। कुरआन और गीता में उन सभी लोगों को सजा का हकदार बताया गया है जो धरती पर बिगाड़ पैदा करते हैं। सोशल मीडिया पर अभद्र लेखन करना भी एक किस्म का बिगाड़ है।

चलते-चलते

कुछ साथियों ने मुझे एक सुझाव दिया है। जरा आप भी इस पर गौर कीजिए। सऊदी अरब से एक भाई का सुझाव है कि मुझे अब एक ई-न्यूजलेटर शुरू करना चाहिए जो बहुत बड़ा न हो और पीडीएफ में हो।

वे कहते हैं – इसमें दो चीजों पर खास जोर दिया जाए- कुरआन की आयतों की आधुनिक सन्दर्भ में व्याख्या और हजरत मुहम्मद (सल्ल.) का महान जीवन। मैंने पूछा- ऐसा क्यों? तो उन्होंने जवाब दिया- मैं मेरे गैर-मुस्लिम मित्रों को ये पीडीएफ न्यूजलेटर भेजना चाहूंगा ताकि उनके दिलों से गलतफहमियां दूर हों और वे जब चाहें उन्हें पढ़ सकें।

सुझाव तो अच्छा है, लेकिन मैं इस पर आप सबकी राय जानना चाहूंगा। क्या कहना चाहेंगे आप? कृपया कमेंट कर मुझे जरूर बताएं।

– राजीव शर्मा (कोलसिया)-

Loading...